छठी किस्त

भाभी और उनकी मिञ मड़ंली का ये रुप देख नेहा के अदंर जाने कौन-कौन से भाव उमड घुमड़ आए|उसे ये अजीब सा अहसास हुआ कि अब वो इत्मीनान से बीमार पड़ सकती हैं|कितना अजीब ख्याल था पर बहुत गहरा| रिश्तेदारी से दूर अगर उसका मन भाभी जैसे अपनो की सेवा-टहल का विचार करे तो कौन सी दीगर बात थी?
    खैर, वैदेही की तबीयत अगले दो-तीन खराब बनी रही|दोनो बच्चो की परीळा ऐसे में ऑपरेशन करा लेने का वो सोच भी कैसे पाती| वैदेही के पति दूसरे दिन शाम तक आए|वैदेही की खराब तबीयत या बच्चो की परीळा के समय का विचार उनके मन से गुजरा हो ऐसा बिल्कुल न था क्योकि लौटते वो अपने साथ तइया भाई और भाभी को लेते आए थे|ये कह कि चलिए नया शहर दिखा दे आपको|
   वैदेही के पति की इस हरकत को जिसने देखा हैरान रह गया|उन्हें जरा अहसास न था कि वैदेही की इतनी मिञ मडंली तैयार हो चुकी हैं और वो भी ऐसी जो आड़े वक्त वैदेही के साथ खड़ी हो|
   ससुरालियों के आ जाने से वैदेही को खड़ा ही होना पड़ा| नेहा और भाभी ने कहा भी कि वो अपने घर से खाना भिजवा देगे पर उनके घरो का बना खाना ससुरालियो के गले नहीं उतरता| वैदेही के पति का टेढ़ा रुख देख नेहा की वैदेही के यहाँ ही कुछ बना लेने की हिम्मत न हुई|ससुराली भी ऐसे की बिस्तर पर ही सारा खाना मिल जाए|
  नेहा मजबूरी में वैदेही को उसके हाल में छोड़ घर वापस हो ली|अगले दिन भाभी के यहाँ यही चर्चा गरम रही|वैदेही के पति की करनी से सभी हैरान थे|इन सब से दीगर नेहा को केवल वैदेही की ही फ्रिक थी|
   बाद में वैदेही ने ही बताया कि उसके पति के ऊपर ससुरालियों का इतना जबरदस्त प्रभाव हैं कि चाह कर भी वो हमारे लिए कुछ नहीं कर पाते| तइया भाई-भाभी का टिकट उन्होनें ही कटवाया था| उन दोनो के आने का केवल यही मकसद था कि जा कर देख आए कि उनकी गृहस्थी में बिना सास की इजाजत कोई नया सामान तो नहीं जुड़ा|पति की हिम्मत ही नहीं हुई कि उन्हें वैदेही की तबीयत का हवाला देते|इतना सब कर लेने पर भी उन पर 'जोरु का गुलाम' होने का जुमला उछाल ही दिया जाता|
       वैदेही की बात सुन नेहा ये आंक ही नहीं पायी कि उस दिन जो वैदेही के पति का रुप देखा वो सच हैं या जो वैदेही कह रही हैं वो हैं यथार्थ|

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