अभी वक्त था फिर भी नीमा ने चाहा कि अपने पति और ननिहाल फोन कर अपनी स्थिती बता दे|पर उसका फोन मिला ही नहीं न इतनी देर से किसी का फोन आया|
जाने कैसे उसका फोन 'flying mode' में पहुँच गया था| उसे 'नॉर्मल मोड'पर लाना उससे हो नहीं पाया|किसी से भी फोन पर बात न हो पाने से उसकी घबराहट बढ़ गयी|
गनीमत ये रही कि सारे नबंर उसने अलग डायरी में भी लिख रखे थे|अतः सामने वाली महिला से उसने आग्रह किया कि वो इस नबंर पर फोन कर हमारी ट्रेन की स्थिती भर बता दे| महिला भली थी और वो तबसे नीमा को बैचेन देख रही थी अतः उसने नीमा को नबंर मिला कर खुद बात कर लेने को कहा|
नीमा ने अपने पति को अपनी सारी परिस्थिती स्पष्ट की| मोबॉइल को 'flying mode' से हटाने का तरीका बताया पति ने|
ऐसा कर लेने के बाद उसकी पति से जब बात हूई तब पता चला कि वो काफी देर से फोन मिला रहे थे| अब जाकर तसल्ली मिली| इस तरह की छोटी बाते भी न सीख पाने का नीमा को बहुत अफसोस हुआ| मौसी - मामा से बात होने पर मालूम हुआ कि वे सब उसे लेने स्टेशन पहुँच रहे हैं|सुन नीमा को रिश्तों के अपनेपन का शिद्दत से अहसास हुआ|
जब ट्रेन लगभग ७.३० बजे कोलकत्ता पहुँची तो उसे यही लगा कि वो परसो से एक जंग लड़ रही थी जिससे वो विजयी हो निकल आयी हैं| सामने बैठे जोड़े को धन्यवाद दे वो दरवाजे पर जम गयी| जब उसे मामाजी- मौसी की पहली झलक मिली तब कितना सुकून मिला उसे|
सफर कई किये नीमा ने पर ये सफर उसके दिलो-दिमाग में अमित छाप छोड़ गया|कई सबक मिले और दिखी इंसानियत|
आप सबका रेल और जिदंगी का भी सफर खुशनुमा बना रहे|
इति
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