पड़ोस में शामली के सबसे मधुर संबंध थे|पर अनु का शायद ही किसी से वास्ता हो|मगर अब सामने जो ये परेशानी आयी तो अकेले कैसे सभांल पाएगी?पल्लव को माँ के पास छोड़ वही बदहवास सी भागी बाहर की ओर| पड़ोस में रहने वाली गुप्ता आंटी को आवाज दे सारी स्थिती से अवगत कराया| आंटी अपना सारा काम वही छोड़ अनु के साथ हो ली| अभी आकाश को कुछ भी बताने से मना किया| बाहर गये आदमी को ये सब बताना और परेशानी पैदा कर देता|
उसके बाद तो पड़ोसियों ने ही सारी जिम्मेदारी अपने सर ओढ़ ली| शामली को अस्पाताल पहुँचाने से लेकर खाने- पीने तक की| अनु ने भी देखा कि वो न सही लेकिन बाहर माँ की कितनी पूछ हैं|कितनी इज्जत अपनापन हैं| जिदंगी के अनुभव मिल रहे थे अनु को|अस्पताल और घर दोनो मोर्च पड़ोसियों ने ही संभाले थे|
दो दिन बाद जब आकाश आया तब सारी स्थिती जान सन्न रह गया|उसे भी कहाँ आया था सबसे निभा कर चलना| शामली की ही वजह से आज सब खड़े थे| जिसे कभी कुछ जाना नहीं वही कड़ी बनी थी आज तक|
शामली को ब्रेन टुयमर निकला|
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