तीसरी किस्त

पलक दौड़ न पायी घर की तरफ| वो अभी मैम से मिल लेगी| कल मैम को उसे डांटने का ज्यादा मौका मिल जाएगा| अभी तो वो भी घर जाएगी जल्दी| उनकी मम्मा भी तो उनका wait कर रही होगी|जो पलक रुम में पहुँची तो वहाँ तो कोई था ही नहीं|पलक को अपने पीछे श्वेता और उसके ग्रुप के बच्चे जोर से हँसते मिले|पलक को बहुत सारा गुस्सा आ गया| उनमें श्वेता को न देख उसका डर फिर बढ़ गया|
  ' हे मां, क्या श्वेता को कुछ हो गया हैं|' अब वो एक पल नहीं रुक पायी वहाँ|
    घर जाकर मम्मा से लिपट खुब रोयी और जो मम्मी को सारी बात बतायी तो मम्मा मुस्कुरा दी| '  मैंने आपको nails काटने को बोला था न| अब से nails काट कर स्कुल जाएगी न आप?' पलक ने तो सोच लिया था वो अपनी मम्मा की हर बात मानेगी| उसने फटाफट सर हिलाया| कुछ नहीं होगा श्वेता को|
   अगले दिन जब उसने श्वेता को सही सलामत देखा तो उसको एकदम यकीन हो गया कि उसकी मम्मी सब ठीक कर दिया करेगी|
  उस दिन के बाद से तीन दिन तक पलक और कविता क्लास से नहीं निकले| न lunch के समय और न free period में| जाने फिर श्वेता को चोट लग गयी उसकी वजह से तो अब भगवान दूसरी बार उसे नहीं बचा पाएगे|
  पलक और कविता बैठ कर lunch कर रही थी कि दो सबसे big क्लास की दीदी अपनी बहन से मिलने आयी पर उनके अलावा तो क्लास में कोई था ही नहीं| तो उन दोनो से ही पुछा और जाते जाते एक दीदी ने पलक के गाल प्यार से खींचे| ' so sweet कहती दीदी तो चली गयी पर पलक देर तक अपने गाल सहलाती रही| अब तो उसका lunch लेना भी मुश्किल होता क्योंकी दोनो दीदी उसी समय आती थी और पलक को bench के नीचे छुपना भी होता था|
  थोड़े दिन बाद दीदी ने आना बंद कर दिया पर पलक ने सोचा दीदी कितनी साफ रहती हैं| इनके तो hanky भी नहीं लेना पड़ता अपनी नाक पोछने के लिए|
अगले दिन english की क्लास थी| मैम बहुत strict थी| उन्होने ढेर सारा काम दिया था अगले दिन कर लाने को|
कविता परेशान थी| मगर पलक देख न पायी कि उसकी दोस्त परेशान हैँ|

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