एक हफ्ता बीतने को था|अलका ने एक बहुत पुरानी सहेली से मिलने की इच्छा व्यक्त की|प्राचीर ने हमेशा की तरह ना-नुकुर की|मगर इस बार भी अलका की इच्छा के आगे उसे झुकना ही पड़ा|थोड़ी देर के लिए ही सही प्राचीर अलका को भेजने को तैयार हो गया|जल्दी में नाम भी न बताया उसने अपनी सहेली का|
इतने दिनो बाद अलका को अपने सामने देख विधी मानो निहाल हो गयी|काफी समय से विधी आगरा में ही बसी थी|अलका ने बताया की वो यहाँ अपनी ससुराल आयी है|
विधी ने अलका से कहा,'अलका,मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम्हारी ससुराल भी आगरा में है|आगरा में किस जगह|पति का नाम क्या है?तेरे सास ससुर का नाम?ढेरो सवाल पूछ डाले विधी ने|
हसं ही दी अलका|' एक साथ इतने सवाल| खैर,मेरी ससुराल रामनगर की है|पति का नाम प्राचीर ससुर का नाम लोकनाथ भटनागर और सास का नाम कातां है|फिर अलका हंस के ही बोली और पुछना है तुझे या इतना काफी है|
विधी को एकबारकी विश्वास नहीं हुआ| फिर भी अपनी तसल्ली के लिए उसने पुछ ही लिया|
' तेरे पति प्राचीर क्या मुंबई में काम करते है'
अलका को सुखद आश्चर्य हुआ|'क्या तु जानती है उन्हें|ये भी कमाल हो गया|' बही जा रही थी अलका अपनी ही रौ में|
पहले ये बता कि क्या तेरे ससुर बैंक में कार्यरत हैं|
'वाह क्या बात है| पुरी जन्म कुड़ली ही निकाल लेगी क्या? तू तो सबको जानती है| मजा ही आ गया फिर तो|' कह अलका कोमल हंसी हंस दी|
' हाँ,मैं तो सबको जान गयी पर तु सबको नहीं जानती," विधी ने गहरी सासं लेते हुए कहा|
"क्यो ये क्यो कहा तूने" अलका अभी भी अपने शरारती अदांज में थी|
मगर जो नजर उठा उसने विधी को दे़खा तब उसे लगा कि मामला कुछ ज्यादा गंभीर है|
विधी ने जब कहना शुरु किया तो लगा उसकी आवाज किसी गहरे कुँए से आ रही है|
अलका मैं तुझे कुछ बताने जा रही हूँ| नहीं जानती कैसे लेगी तू इस बात को मगर दिल मजबूत करना होगा तुझे"
अलका को नहीं अंदाज था ऐसे किसी भी मोड़ का|
CONVERSATION
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें
(
Atom
)
About me
Popular Posts
-
अपनी बालकनी से झाकंते नेहा ने पहली बार वैदेही को देखा था|ट्रक से उतरते सामान पर उसकी नजर टिकी थी|उसके पति तबादले पर यहाँ आए लग रहे थे| आस-पा...
-
नेहा ने तबादले से होने वाली टुटन को दिल से महसूस किया था| जब पैर जमने लगते और दोस्तो की ऱेहरिस्त लंबी होने लगती तब वहाँ से उखड़ किसी दूसरी ...
-
समय ईशा स्कूटी स्टैंड में लगा घर के अंदर प्रविष्ट हुई|सामने स्वरा बैठी थी पर ईशा उसे अनदेखा कर किचन की ओर बढ़ गयी|उसका ये व्यवहार स्वरा को आह...
-
बैसाखी वो खासी पुरानी इमारत थी जिसके तीसरे माले में वह रहती थी। ऊपर तक चढ़ते मुझे हफनी आ गई। "रेनू के हाथ में जादू है। एक बार उस...
-
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी सुधीजनों को शुभकामनाएं। इस अवसर पर अपने कुछ हाइकु पटल पर प्रेषित कर रही हूँ। हिंदी ही भाषा विश्व पटल पर मान बढ़ाये...
-
आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उस...
-
जेवर "जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है...
-
रामलाल की बिटिया निम्मो की आज शादी हैं| दो गली छोड़ श्यामलाल के घर से रामलाल के घर के पूराने संबंध हैं| पारिवारिक रिश्ते बहुत ही ...
-
लकीरे राहुल के घर का आज गृहप्रवेश था|बड़े शौक से बनवाया शानदार घर| पूरा घर गुलाब और गेंदे की लड़ियों से गमक रहा था|अभी मेहमानो का आना शुरू न...
-
गुरु मंत्र मैं अपनी ही बहन का फोन "इग्नोर"करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय ...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें