दूसरी किस्त

अलका रसोई में ही माँ के पास आ कर बैठ गयी| थोड़ी देर बाद पापा और छोटी बहन भी वही जीम गये|पापा का चेहरादेख अलका को गहरी ठेस पहुँची|दो दिन में ही उनका चेहरा और ज्यादा बुढ़ा नजर आने लगा था|छोटी बहन भी सहमी सी लगी|
   अलका ने किसी तरह नाश्ता खत्म किया और फिर से अपने कमरे में आ गई| किसी से बात करने का मन नहीं हुआ उसे| कमरे की रोशनी जब चुभने लगी तो बत्ती बुझा बिस्तर में निढाल सी पड़ गयी|खुद को बहूत थका सा महसूस किया उसने|वो फिर अतीत में गोते लगाने लगी|
      प्रथम ञेणी में एम.ए पास करने के बाद जीवन को बहूत उम्मीद भरी नजरो से देखा था उसने|किशोर मन अक्सर उसे अक्सर गुदगुदा जाता|ऐसे समय उसके जीवन में प्राचीर  आया|
       हुआ यूँ की अलका के माँ बाप ने उसके विवाह के लिए लड़को की तलाश शुरु कर दी|मगर दहेज की भारी माँग के आगे अलका की सारी खुबियाँ फीकी पड़ गयी|ऐसे में अलका के पापा के एक मिञ ने प्राचीर को अलका के लिए सुझाया|
     प्राचीर खुबसूरत,पढ़ा लिखा और अच्छे ओहदे पर था|सबसे राहत देने वाली बात तो ये थी कि दहेज की कोई माँग नहीं थी|लड़के वालो ने पहली नजर में पसंद कर लिया अलका को|
  लड़के वालो की एक शर्त ये भी थी कि विवाह समारोह बिना किसी आडबंर के हो| अलका के माँ बाप ने आँख मूंद कर इस रिश्ते पर मोहर लगी दी|
     हर माँ बाप की तरह अलका के माँ पापा ने अलका को अपनी हैसियत से अधिक दिया|घर की पहली शादी जो थी|विवाह विधीपूर्वक सपंन्न हूआ| अलका विदा हो ससुराल आ गई|माँ पापा खुश थे कि देर ही सही अलका  को अच्छी ससुराल मिली|

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