फार्म हाउस उसकी आशा से भी बड़ा था|जो प्रिया चली तो बीच में रूक-रूक कर जैसे जायजा ले रही हो किसी की आहट की|कोई आहट नहीं सब शांत|
प्रिया ने पीछे का रास्ता पकड़ा आगे से खतरा ज्यादा था|फार्म हाउस के पीछे दीवारो से सटी गमलो की लबीं कतारे थी| फिर मखमली दूब मानो छितरायी थी चारो ओर| घास के बीच सगंमरमरी रास्ता बना था आवा-जाही का| प्रिया ने दबे पाँव घास पर अपने कदम बढ़ाये| सारे कमरो से घिरा लबां बरामदा था|जो वो थोड़ी दूर बरामदे में चली तो उसे कही से आपस में बात करने की धुधंली आवाजे पड़ी| आवाज की दिशा में बढ़ चली वो|
कमरो की खिड़कियों को मोटे परदो से ढक रखा था फिर भी एक कमरा छुट गया था मानो इतनी सजगता के बावजूद| कमरे से रोशनी झांक रही थी|परदा इस हद तक हटा हुआ कि प्रिया कमरे का जायजा ले सकती थी|
प्रिया ने पर्स में टटोला और अपनी revolver निकाली|जी हाँ अपनी सर्विस रिवाल्वर|प्रिया खुफिया विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर थी और वो इसी मिशन के लिए यहाँ आई थी| फार्म हाउस में बढ़ती गतिविधियाँ विभाग के लिए पहेली बनी थी और इन्ही गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात थी प्रिया|
अपनी आँखो को अभ्यस्त किया रोशनी में फिर जो अदंर झांका तो जैसे दंग रह गयी|तमस के होने की पूरी उम्मीद थी उसे वहाँ पर |जो नहीं उम्मीद थी वो था सुहास|उसकी आवाज को तो जैसे लकवा मार गया|
एकदम सभांल नहीं पाई वो अपने आप को|जो गिरने को ही हुई तो सभांल लिया किसी ने|
अपने को सभांलती जो वो उठी तो सामने बिरजू खड़ा था|प्रिया चिल्ला ही पड़ती लेकिन आवाज ने साथ नहीं दिया|
जो प्रिया ने अपने आप को समेटा और अपनी रिवाल्वर का रूख बिरजू की तरफ मोड़ दिया|बिरजू को एहसास हो जैसे उसने आगे बढ़ कस कर प्रिया की कलाई पकड़ ली| और दूसरे हाथ से प्रिया के मुहँ को कस कर बंद कर दिया|
बिरजू ने अपना मुहँ प्रिया के पास ले जा धीमी आवाज में कुछ कहा| प्रिया की आँखे फैलती चली गई इस नये रहस्योघाटन से|
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