सातंवी किस्त

प्रिया को लगा अब कुछ करना ही है उसे|वो एक बार फार्म हाउस जाकर स्थिती का जायजा जरूर लेगी|बिरजू को साथ ले जाने का सवाल नहीं उठता|प्रिया को अहसास था कि बिरजू उस पर जरूरत से ज्यादा सतर्कता दिखा रहा है| उसे कुछ और हो जाने का अहसास हो जैसे|
    अभी दिन था तो अभी बाड़ के आस-पास भी जाने का खतरा वो नहीं उठा सकती थी| रात घिरने का इतजांर करने लगी| तीन- चार जरूरी फोन किए| सारी बाते समझायी किसी को| उधर से कुछ कहा गया और प्रिया एकदम निश्चंत हो गयी जैसे|वो पर्स जो प्रिया हमेशा अपने पास रखती थी उसका सारा सामान निकाल फिर से चेक किया| करीने से दोबारा लगाया पर्स में|अब मानसिक तौर पर बिल्कुल तैयार थी| कल और आज की प्रिया में अंतर था जमीन आसमान का|आज लबरेज थी आत्म विश्वास से|
     रात उतर आयी| खाना खा कर सोने की तैयारी करती दिखी|जब उसे लगा कि सन्नाटा खींच गया चारो ओर तब हल्का सा दरवाजा खोल वो बढ़ गयी बाड़ की तरफ|
     Pencil torch की हल्की रोशनी में बाड़ के पास रूक जायजा लिया|अनगिनत पैरो के निशान उभरे थे गीली मिट्टी पर और थे सिगरेट के टोटे|
       बाड़ से निकल बढ़ गयी फार्म हाउस की तरफ|डर बिल्कुल नहीं था प्रिया के चेहरे पर| अपना पर्स कसकर थाम लिया उसने|

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