छठी किस्त

जब से तमस को फार्म हाउस जाते देखा उसकी गतिविधियो पर नजर रहने लगी प्रिया की| राज तो था गहरा कुछ दबा ढका सा|
   रात के उस पहर के आस-पास प्रिया खिड़की की ओट से बाहर की आहट लेने लगी|फार्म हाउस की विशालता का अहसास पेड़ के झुरमुट के बीच ही था| सही स्थिती का आभास नहीं था उसे|फार्म हाउस की दूधिया रोशनी तमस का होना तय कर गयी थी|
   कल की ही बात थी जब तमस को लगा कि वह किसी की नजर में नही है बाड़ पार कर गया|चाल में उतावलापन था|राज गहरा था और प्रिया उसे जान लेने को उतावली हो उठी|
     कल जो दिन में भी गया तमस फार्म हाउस की गतिविधियाँ तेज हो गयी थी| बिरजू को भी जाते देखा तब उसका धैर्य जवाब दे गया|
        मन बना ही था प्रिया का कि कुछ ऐसा हुआ जिससे प्रिया का शक यकीन में बदल गया कि हो न हो इसके तार फार्म हाउस से जूड़े है|
   हुआ यू कि कस्बे के इकलौते बैंक में बड़ी डैकेती पड़ी|आस- पास के तमाम गाँव वाले अपना पैसा उसी बैंक में जमा करते थे|गाँव में पहले कभी हुआ नहीं कुछ ऐसा फिर गाँव वालो की तमाम पूँजी जमा थी इसमें| जो मामले को तूल पकड़ना था और मामले ने तूल पकड़ा|
      फार्म हाउस की गतिविधी जो डैकेती पड़ने के एक दिन पहले तेज हूई थी एकदम बंद हो गई|तमस तो जैसे गायब हो गया और बिरजू जरूरत से ज्यादा सचेत|

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