"मरे हुये लोग"के अंतर्गत
वो आधे घंटे से सड़क पर पड़ा था|सिर से बेतरह खुन बह रहा था|लोग गाड़ी रोक एक नजर डालते और आगे बढ़ जाते| लग रहा था जैसे कोई तमाशा चल रहा हो|
मेरा चुंकि ऑफिस आने जाने का यही रास्ता था,मैं भी वहाँ से गुजर रहा था|भीड़ देख रुक गया|उसकी हालत देखी तो तुरंत मदद को आगे बढ़ गया|
"अरे!!!पुलिस केस है|क्यों लफड़े में पड़ रहे है|थाने के दसियों चक्कर काटने पड़ेंगे|"
"इसकी जान तो बच जायेगी|जाने किस घर का चिराग हो|"
मेरी पहल पर दो-तीन और लोग आगे आये|पर अस्पताल तक किसी का साथ न मिला|"कौन इन चक्करो में पड़े वाली मानसिकता|"
उसकी समय पर मदद से जान बच गयी|मुझे राहत मिली|
उसके होश आने पर नंबर ले मैंने उसके घर फोन कर इत्तिला कर दी|और उनके आने तक उसके पास बना रहा|
"आप.नहीं होते आज तो शायद मैं भी नहीं होता|"उसकी आँखो में मेरे लिए आगाध श्रृद्धा थी|"आपने मेरी जान तो बचाई,एक सबक भी दिया"|
"सबक कैसा"मैंने पुछा|
"एक बार मैं ऐसी ही मरती हालत में एक युवक को छोड़ आगे बढ़ गया था|पता नहीं उसे आप सा कोई फरिश्ता मिला या नहीं!!!सड़क में पड़े,मुझे उसकी बहुत याद आयी|कोशिश करूंगा कि मरे हुये लोगो की तरह मेरा जमीर अब कभी न मरे|"
अच्छे काम कभी जाया नहीं जाते|मुझे भी तो इस युवक में अपना ही अक्स दिखा आज|
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