पापा की बदली दूसरे शहर में हो गयी हैं| आकाश माँ के साथ मेरठ में ही रुक गया | एग्जाम हो जाने के बाद वो और माँ पापा के पास देहरादून जाने वाले थे| आकाश को अपने स्कूल, दोस्तो के छुट जाने का बहुत दुख था| वो पापा से बार बार ये बात कहता |
" पापा, प्लीज, आप यही रह जाईये न| बड़े अंकल से बोल दीजिये कि हम यहाँ से नहीं जाना चाहते और आकाश की बारहवी हो जाने तक हम यही रहेगे|"
पापा आकाश को समझाते हैं,"बेटा, बड़े अंकल मेरी इस बात को नहीं मानेगे| देखो, अक्षत के पापा को भी भोपाल जाना पड़ा न| थोड़े दिनो बाद अक्षत भी चला जायेगा|"
पापा की बात आकाश समझ तो रहा था पर अपने स्कूल, दोस्तो के छुट जाने की बात उसे बहुत परेशान कर रही थी| माँ ने भी समझाया," बेटे, तुम्हारे नाना की तो तीन तीन साल में बदली होती थी| हमे दुख तो होता था पर नये स्कूल, नये दोस्त बनाने की उमंग भी रहती थी|"
माँ, पापा.के समझाने पर भी आकाश उदास रहने लगा| शाम को बाहर जाकर खेलना भी उसने बंद कर दिया| अपना विरोध जताने के लिए या तो वो टी.वी देखता या मोबॉइल में लगा रहता| खाने की मेज पर भी मोबॉइल से चिपका रहता| उसकी पढ़ाई पर भी अब असर दिखने लगा था| किताबो को पढ़ने की बजाय वो मोबॉइल में गेम खेलता| टोकने पर चिल्ला उठता| उसके इस तरीके से माँ-पापा दोनो परेशान हो गये|
उन्हीं दिनो मामा को तीन महीने किसी काम से मेरठ आना पड़ा| माँ-पापा तो खुश हुये ही,आकाश भी खुश हो गया| क्योंकि मामा से उसकी खुब दोस्ती थी|
पापा के देहरादून जाने के पहले ही मामा आ गये थे| आकाश में आ गये बदलाव को वो भी देख रहे थे|
एक दिन आकाश मामा को बुलाने उनके कमरे में गया| उसे बिस्तर पर रंग बिरंगे चित्रो से भरी जानवरो और अलग अलग तरह के पेड़-पौधो की कई किताबे दिखी| इस तरह की किताबे आकाश को बहुत पंसद थी| वो ध्यान से इन किताबो को देखने लगा| इतने ध्यान से कि कमरे में कब मामा आकर खड़े हो गये उसे पता ही नहीं चला| इतने दिनो बाद आकाश के चेहरे पर छायी खुशी को वो देख रहे थे| उन्होंने आकाश के सिर पर प्यार से हाथ फेरा|
"मामा, ये किताबे तो बहुत सुदंर हैं| मुझे ऐसी किताबे बहुत अच्छी लगती है|" आकाश ने मामा को देखते हुये कहा|
" मेरे पास तो ऐसी बहुत सी किताबे रखी है| मैं तुम्हें रोज एक किताब पढ़ने को दुँगा| पर आपको भी एक प्रॉमिस करना होगा| बोलिए करेगे न|" मामा ने कहा तो आकाश ने अगुँठा उठाकर "डन" कर दिया|
" तो आपको प्रॉमिस करना होगा | आप समय से अपना स्कूल होमवर्क करेगे| साथ में वो सारे सब्जेक्ट भी रिवाइज करेगे जो उस दिन स्कूल में पढ़ाये गये हैं| मोबॉइल खेलने का भी टाइम बना लेगे| वो भी एक दिन में एक घंटा| आपको ठीक लगे तो कल से ही रोज मैं एक किताब आपके लिए ले आऊंगा||"
आकाश ने मामाजी से फिर प्रॉमिस किया| पढ़ाई के साथ साथ इस रंग बिरंगी किताबो में भी उसका खुब मन लगने लगा| अलग अलग तरह के पेड़-पौधो के बारे में उसे बढ़िया जानकारी मिलने लगी | माँ से कह कर नर्सरी से उसने फूलो के कई पौधे मगँवाये और गमलो में लगाये| थोड़े दिनो में ही सुदंर फूलो से उसकी बालकनी भर गयी| इतनी हरियाली आकाश के मन में एक नया उत्साह जगा गई थी| आकाश की उदासी अब मिटने लगी| पढ़ाई में भी वो पहले की तरह अव्व्ल आने लगा|
अपने मामाजी को वो अब "इको फ्रेंडली मामाजी" बुलाता है| उसने माँ से कहा है कि जाने से पहले वो उनके,पापा और अपने नाम का एक एक पौधा जरूर लगायेगा|
अंजू निगम
देहरादून
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