नज्म
मुमकिन हैं वो जफा कर जायेगा,
वफा का मंजर बेअसर कर जायेगा|
शजर जो चमक रहा था पेशानी पर,
हूर सा असर उस पर कर जायेगा|
मंजर मंजर पानी हो रहा हैं अब तो,
मौसम का ये खुमार भी उतर जायेगा|
आलम हैं हर तरफ क्यों दगाबाजी का
ये जुनून भी शायद अब उतर जायेगा|
उस सहर जो महाजबीन थी न एक,
वो मिरी रुह तलक आ संवर जायेगा|
वादो की मियाद खत्म अब हो चली हैं
जफा के इस खौफ से वो मर जायेगा|
अंजू निगम
देहरादून
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