लघुकथा सृजन एंव सार्थकता
आपकी लघुकथा सृजनात्मकता किस दिशा में हैं या समाज के गुढ़ विषयो पर आपके विचार कितने सकारात्मक या नकारात्मक हैं, ये आपके अपने मानव मूल्यो पर निर्भर करता है|
दूसरे जो लघुकथा मौलिकता के आवरण में लिपटी हो वही लघुकथाकार की दृष्टि को संप्रेषित करती हैं|
लघुकथा में शब्द सीधे-सरल तो हो जो सीधे पाठको के मर्म को छुये पर सपाट न हो| उतार-चढ़ाव रहित लघुकथा में सजृनात्मकता शुन्य की तरफ हो जाती हैं|
मन के भावो को कागज में मात्र उकेर देना लघुकथा के मापदंड के अनुरूप नहीं आता| शब्द विन्यास, सटीक भावनात्मक दृष्टिकोण ,संवादो की आवश्यकतानुसार उपलब्धता भी एक लघुकथा को सार्थक लघुकथा बनाती है|
कई बार देखा गया हैं कि सीमित अवधि में लेखक/लेखिकाओं द्वारा निरंतर लेखन से लघुकथा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ता हैं| विषय चाहे नया हो पर चितंन की कमी से लघुकथा अपना असर खो देती हैं| त्वरित और प्रयोगात्मक विषयो को लेकर कई लघुकथाएं लिखी जा रही हैं| जो पाठको में मंथन के नये आयाम तय करती हैं|
एक ही विषय को तोड़-मरोड़ कर अलग शब्दों में पिरो मात्र देना, सृजनात्मकता का हनन हैं| अब नये दिमाग जो आधुनिक तकनीक से भी लैस हैं, लघुकथा के सागर में अनूठे मोती प्रवाहित कर रहे है|
किसी भी लघुकथा की सार्थकता इस बात पर निर्भर हैं कि उसकी मारक क्षमता कितनी प्रबल है| शब्दों की घट-बढ़ लेखक/लेखिका की सृजन क्षमता को इंगित करता है| और यही प्रभावी,औसत या प्रभाव हीन के दायरे तय करता हैं|
सांकेतिक भाषा में लघुकथा लिखने का हूनर इस बात पर पूर्णतः निर्भर करता है कि आपके अंदर कितनी रचनाशीलता हैं| मन से निकल कैनवास में किसी कुशल चितेरे से शब्दों के संकेतात्मक चित्र इस तरह उकेरना कि वो पाठको से विचारो के समुद्र में गोते लगवा ले, लघुकथा की सार्थकता , श्रेष्ठता की ओर इंगित करता है|
अक्सर लघुकथा को भव्य बनाने के लिए भारी-भरकम शब्दों का जो प्रयोग किया जाता हैं, वो कई बार अलग विषय पर उठायी गई लघुकथा को भी गर्त में ले जाती हैं|
चमक तो वही अच्छी लगती हैं तो आपकी आँखो को चौंधियाये नहीं| बल्कि गहन अंधकार को चीर ओजस्विता प्रदान करे|
लघुकथा वही सार्थक मानी जाती हैं जो नियमो और शब्द सीमा के दायरे में बंधी होकर भी नये पुष्प सी पल्लवित हो | जो नये कलेवर से युक्त हो ,कल्पनाशीलता की उड़ान तो हो मगर यर्थाथ के भी अति निकट हो|
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि आपकी सृजनात्मक शक्ति ही लघुकथा की सार्थकता को फलीभूत करती हैं|
अंजू निगम
देहरादून
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