मुहाना

बैठी हूँ मुहाने पर तेरे,मुसाफिर की तरह,
इंतजार का हर लम्हा बीता,सदियों की तरह|

मंजिल दूर कही खड़ी होगी,तन्हाई सी लिये,
बैठे हैं हमसफर की तलाश में,रहगुजारो की तरह|

अंजू निगम
इंदौर

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top