खामोशी
खामोशी लिखते और मिटाते रहे,
उनको कुछ इस तरह भुलाते रहे|
खुद को खुद से भी जब मिलाया,
अजनबी बने खुद को जताते रहे|
बेगैरत सी ही फितरत रही उनकी,
दोस्त कह अपने को मिलाते रहे|
इश्क ने तबाह कर दिया मुझको,
वो अय्यार से बने दहकाते रहे|
मंजिल का ठिकाना क्या था न पुछो,
चलते-चलते ही हम राह बनाते रहे|
खामोश आँखे आईना बन गयी जब,
"अंजू" नजरो से नजरे वो चुराते रहे|
अंजू निगम
इंदौर
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