परिक्षा

विभा अपनी उम्र का लिहाज छोड़,हाथ में झांडू पकड़े,स्टूल पर चढ़कर जाले साफ करने लगी|
"माँ,आपने क्यों  ये सब करना शुरु कर दिया| रामु कहाँ है?"विभोर परेशान सा बोल उठा|
"रामु बाजार गया है सामान लाने| घर का काम वो करे या मैं| इतने जाले लटक रहे है पर किसी की आँखो ने पट़ी बाँध रखी है|सारी दरिद्रता की निशानी है|"कह उसी रोष में स्टूल से नीचे उतरते विभा का पैर  मुड़ गया| पैर में गहरी मोच आ गयी थी|
घर के काम को ले वो परेशान हो उठी| संध्या ने सांत्वना दी और ऑफिस से एक हफ्ते की छुट्टी ले ली| सुप से लेकर खाने तक की हर जिम्मेदारी संध्या ने बखूबी निभाई|
एक हफ्ते बाद जब विभा कमरे के बाहर निकली तो घर एकदम चमक रहा था| देख विभा की आँखे खुशी के अतिरेक से बहने लगी|
   " आज मेरी बहू आड़े वक्त आई इस परिक्षा में पूरी तौर पर खरी उतरी|"

अंजू निगम
इंदौर

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