अल्फाज

न ख्वाब लिखुँ,न याद लिखुँ,
फिर क्या किसी का एतबार लिखुँ|

न चाँद लिखुँ,न चाँदनी लिखुँ,
फिर क्या एक शम्स का गुरूर लिखुँ|

न अल्फाज लिखुँ,न अहसास लिखुँ,
फिर क्या कोरे मन का जिस्म लिखुँ|

न धूप लिखुँ,न छांव लिखुँ,
तो क्या बस मौसम का मिजाज लिखुँ|

सोचा तो एक महफिल लिखुँ,एक शमा लिखुँ,
और परवानो का हाल लिखुँ|
       ★अंजू निगम★

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