तकिया कलाम
कजरी के देवर एक साल हुये कानपुर की एक फैक्ट्री मे लग गये हैं| लखनऊ आना-जाना बना रहता हैं| अबकी बार सवेरे-सवेरे ही निकलने की तैयारी दिखी|
"भौजी, फटाफटी दो परांठे उतार दो| रास्ते के लिए चार रोटी,सब्जी,आचार बांध देना| रात का सहारा हो जायेगा वहाँ पर|"
भाभी भी चुहल करती बोली,"लल्ला अब तो हाथ बाँटने के लिए देवरानी ले ही आओ|"
"क्या भौजी,सुबह हमही मिले वहाँ पर|"
"वहाँ पर?कहाँ पर?का वहाँ पर कोई देख रखे हो?"
"अरे बहूरिया!!! ई तो हमार लल्ला का "तकिया कलाम" भये|" कह रसोई में आती अम्मा खिस्स से हंस दी|
"हम बताये अम्मा,ई जोन हमाये छोटु हैं, बात-बेबात में "अभी एक मिनिट" बोलते हैं|
बहू की इस बात पर अम्मा भी पीढ़ा खिसका 'पंचायती रस' का आंनद लेने बैठ गयी|
"जोन आप कानपुर गयी रही|और पीछे हम बिस्तर पकड़ लिये| तब ई छोटु से कहे कि जा दूध पका ले| तुरंत बोले,"अभी एक मिनिट "में|अब अम्मा आप ही बताओ कही एक मिनट में दूध पकता हैं| बाद में पता चला दूध चढ़ा साहब और काम में लग गये| और दूध रबड़ी बन गया| हम बताये अम्मा,गनीमत भई कि दूध पेंदी नहीं छुआ| ओ दिन बाजार भेजे तरकारी लेने तो एक मिनिट का कह घंटे भर बाद आये|
फिर फुसफुसाते अम्मा के कान में कुछ और रस उड़ेला," हम बताए अम्मा, हमाये "ऊ"का तकिया कलाम| "सरकारी अफ्सर"
"ई कौन तकिया कलाम हुआ|" अम्मा हैरान हुई|
"हम बताये अम्मा, दूध वाला,रेहड़ी वाला,किराने वाला सभी इनका फेरे में आ चुके हैं| पर ओ दिन तो ई एक सरकारी अफसर को ही "सरकारी अफसर "का अपना तकिया कलाम सुना दिये रहे|"
अम्मा बैठी टुकुर-टुकुर अपने सपूत की वीर-गाथा सुन रही थी|
फिर बोली," तुम सबका तो बखान ली बहूरिया| अपनो न बतायी|"
"हमाये तो कौनो नाहीं"
"हैं न"
"का"
फिर कजरी को तुरंत याद आया| और अम्मा का हाथ अपने हाथ में ले खिस्स से हंस दी|
अब ई भी,"हम बताये अम्मा"
अंजू निगम
इंदौर
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