प्यार ही तो हैं

"मत लो समय का नाम|मुझे नहीं सुनना"माधवी कान में हाथ रखते बोली|
"अभी तक भूल पायी हो क्या?"स्नेहा का प्रतिप्रश्न,माधवी के सामने खुले लैपटॉप में देखते हुये|
"शायद मैं भी नहीं और वो भी नहीं"समय के गले में पड़े पीले स्कार्फ को सहलाते माधवी ने कहा|
"जाओ फिर मिल आओ| समय नीचे खड़ा हैं|"
माधवी नीचे की ओर भागती हैं|सामने समय को देख उसके कदम लड़खड़ा जाते हैं|
समय माधवी को थाम लेता हैं|
"अभी गिर जाती तो?"
"हमेशा की तरह तुम थे न थामने के लिये|"
    अंजू निगम
       इंदौर

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