बयार
काम निपटा कर जाती बुधिया को सौम्या ने पीछे से आवाज दी|
"जबसे ये कोठियों का काम पकड़ा हैं, तेरे पैर तो टिकते ही नहीं|अच्छा सुन कल लक्ष्मी को १० बजे तक भेज दियो|साथ मैं चार लड़कियाँ और एक लंगूर भी मिल जाये तो लेती आईयो|"
"बीबीजी, कल -परसो तो लक्ष्मी को बिल्कुल"टेम" नहीं|कोठियों से बुलावा हैं|"गर्व से तनी बुधिया की आँखे चमक रही थी|
"बीबीजी, ये मेमसाब अच्छे पैसे टिकाती हैं और परसाद भी रच कर देती हैं|यहाँ मोहल्ले तो १०/-रुपल्ली टिका देते हैं|ज्यादा भक्ति जागी तो एक रुमाल|"बुधिया मानो सौम्या को आईना दिखा रही थी|
"अरे!!!!!शाम तक तेरी लाडो वही बनी रहने वाली हैं क्या?प्रसाद खाने का भी टाइम नहीं|",सौम्या के स्वर से रोष टपक रहा था|
बुधिया ने सौम्या के स्वर के तीखेपन को परखा,कुछ सोच-विचार किया,"बीबीजी, परसाद ही तो देना हैं, मुझे पकड़ा देना|वहाँ कोठियों वाली मेमसाब भी तो यही करती हैं|"
"आज तो तेरे सुर बदले हैं बुधिया!!तुझे मालूम नहीं मैं कैसे धरम-करम से कन्या पूजन करती हूँ|जब कन्या की सेवा नहीं की,उन्हें आदर से खिलाया नहीं तो कैसा कन्या पूजन?"
"बीबीजी,मैं ये बड़ी-बड़ी बाते न जानती|मैं इतना जानती हूँ कि आदर से पेट न भरे हैं|"
★अंजू निगम★
#25,TYPE-IV
C.P.W.D OFFICER'S COLONY,
BUNGLOW NO.10,
A.B ROAD,
INDORE-452001
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