कुछ तुम्हारा

कुछ बहता जा रहा हैं,
पता नहीं हवा हैं या मन|
कुछ छलकता सा जा रहा हैं,
पता नहीं अश्क हैं या तन का पिजंर|
कुछ बेबसी,बेकसी सी हैं,
पता नहीं दिल की हैं या दिमाग की|
बंदिशें हैं कुछ,
पता नहीं रिवाज की हैं या रवायतो की|
कुछ सिसकियाँ हैं,
पता नहीं रूह की हैं या किस्मत की|
कुछ अहम् था,
पता नहीं मेरा या सिर्फ तुम्हारा|
कुछ मैं थी,
पता नहीं केवल अपनी या थोड़ी तुम्हारी भी|

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