टुट रही हैं सांस ख्वाहिशों की,
चटक रहे हैं अरंमा,शीशे की मांनिद,
चलो फिर एक जिस्म ओढ़ लूँ अलग सा,
फिर एक चेहरा नकली लगा लूँ,
हँसू कि दूनिया कहे,
वाह रे!!!कितना खुशनसीब हैं|
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