प्रिय पाठको,
        आप सब को नवरात्र की अनेक शुभकामनाएं|आप सब जीवन में तरक्की करे|

कुछ पल जो फंसे थे उन तस्वीरो मे,
यादो के कितने संमदर समेटे थे अपने मे,
मेरी कश्ती देर तक भटकती रही इस संमदर में,
यादो को भी कभी किनारे मिले हैं क्या?

कुछ यादों के दौर तो गुजर चुके हैं,
फिर वे क्यों खड़ी हैं मेरा इंतजार करती,
क्यों चली आती हैं बार बार दर्द के शमा जला कर,
रूखसत हो ये जो रूसवा करती हैं मुझे|

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