दूसरी किस्त

चायशरा कछुए को पका कर खाने की जिद करने लगी|सौतेली माँ के कहने व प्रताड़ित करने पर विवश हो शंद्रेंबी ने उसे आग पर चढा दिया|धीरे-धीरे शंद्रेंबी की कछुए रूपी माँ मर गयी|वह दहाड़ मार कर रोने लगी|
  एक दिन जब शंद्रेंबी और चायशरा तालाब से पानी लेने गयी तब उस देश के राजा ने शंद्रेंबी को उठा लिया और अपने रानी बना लिया|चायशरा और उसकी माँ मन मसोस कर रह गये|
शंद्रेंबी के दिन खुशी से बीतने लगे|उसके एक पुत्र भी हुआ|तब सौतेली माँ ने उसे खाने पर बुलाया|शंद्रेंबी खुब गहने-कपड़े पहन कर आयी जिससे चायशरा को ईष्या हुई|उसने उसके गहने पहन लिये|वापस माँगने पर उसे चारपाई के  नीचे फेंक दिया|शंद्रेंबी जैसे ही गहने  उठाने नीचे झुकी दोनो ने मिल कर उस पर खौलता पानी डाल दिया|बेचारी शंद्रेंबी वही मर गयी|
  अब चायशरा शंद्रेंबी  के कपड़ें पहन राजमहल गयी|राजा के शंक करने पर बहाना बना दिया|उधर शंद्रेंबी कबुतर के रुप में घसियारे के सामने प्रकट हुई|तथा उससे सारा रहस्य राजा के सामने प्रकट करने को कहा|राजा को जब ये मालूम  हुआ तो उसने कबुतर को पकड़ पिजड़े में बंद कर लिया|रात में सपने में शंद्रेंबी ने प्रकट हो कहा ,"सात दिन मुझे बुरी नजर से बचा कर रखिये|आठवें दिन मैं प्रकट हो जाऊँगी|छठें दिन राजा किसी जरूरी काम से बाहर गया|तभी दुष्ट चायशरा ने कबुतर को मार उसकी सब्जी बना दी|राजा को जान ब हुत पछतावा हुआ|उसने सब्जी फिकवा दी|उस जगह एक नीबू का पेड़ उग आया|उसमे एक फल लगा|
    एक दिन फल खाने की इच्छा से घसियारे ने जैसे ही फल तोड़ा उसी समय राजा का बुलावा ख गया|उसने नींबू को चावल के बरतन में रख दिया|सात दिन होने पर शंद्रेंबी मानव रूप में प्रकट हुई|घसियारा ये देख हैरान रह गया उसने राजा को सुचना दी|
  राजा ने दरबार लगा शंद्रेंबी और चायशरा को बुलाया|तब चायशरा ने शंद्रेंबी पर तलवार से वार किया|जिसमें शंद्रेंबी बच गई"|पर शंद्रेंबी के तलवार के वार से चायशरा न बच पाई|और उसका सर धड़ से अलग हो गया|
   इस तरह सच्चाई की जीत  हुई|

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