दूसरी किस्त

फिवोंक के वापस आने पर सब लोगों ने इस समस्या पर पुनर्विचार किया और चूहे(सजू)को भेजने का निश्चय किया|
  सब लोगों ने कहा कि,"चूहे भाई तुम्हारी जीभ बहुत लंबी हैं|तुम सूअर के ऊपर चढ़ जाओ|वह तुम्हें तुइहयम को तैर कर पार करा देगा|फिर तुम धान के बीज को संकरी दरारों से निकल लेना|और तुम दोनो धान के बीज को वापस ले आना|"
     उन लोगों के अनुरोध पर चहा तैयार हो गया|वो फिवोंक के ऊपर बैठ गया|और दोनों ने तुइहयम को पार किया|उसने संकरी दरारों में फंसे बीज को बड़ी आसानी से निकाल लिया|फिर दोनों वापस आ गये|उन दोनों को वापस आया देख सब बहुत खुश हुए|
    चूहे ने गर्व से कहा कि धान का बीज लाने की वजह से वो सबसे प हले धान खायेगा|
   लोगों ने उसे समझाया कि" ये एक ही धान का बीज हैं|अगर तुम इसे खा लोगे तो ये खत्म हो जायेगा|इसलिए सबसे पहले इसे बो देते हैं|जिससे नयी फसल उगेगी और धान की मात्रा बढ़ जायेगी|तब तुम भरपेट चावल खा लेना|इसलिए जब तक फसल नहीं आती तुम इसे नहीं खाओगे|"
   लोगों के कहने पर चूहा मान गया|इसके बाद से ही मिजोरम में धान की फसल उगने लगी|
   आज भी मिजो समाज धान का बीज लाने के लिए चूहे के अहसान मंद है|और वहां के बुर्जुग आज भी कहते हैं|"जब अन्नाघर में चूहे चावल खाते हैं तो उन्हें मारना न ही नहीं चाहिए|और उन्हें शुभ समझ कर छोड़ देना चाहिए|"

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