नैण अपने घर मुस्कुराते चल दी|घर आते उसने चुल्हा जलाया|दो लकड़ियां लगायी और चुल्हे मे पतीला चढ़ा दिया|
सबसे पहले चौकीदार गुनगुनाते हुये आया|वह अभी नैण को छुने के लिए वो आगे बढ़ ही रहा था कि नबंरदार ने आवाज लगा दी|चौकीदार ने डरते कहा,"ओ नैणी,मुझे बचाओ|"नैण ने उसे उल्टी घघरी पहना दाल पीसने बिठा दिया|
नंबरदार के बाद वजीर आया|तो नबंरदार ने कहा,"ओ नैणी, मुझे बचा|मेरी इज्ज्त खतरे मे है|"नैण ने उसका दिउट बनाया और उसके ऊपर लैंप रख दिया|
इसी प्रकार जब वजीर अंदर आया ही था कि राजा आ गया|वजीर के अनुनय विनय करने पर नैण ने उसका मुँह मिट्टी से लीप दिया तथा उसे अलमारी मे बिठा दिया|
अभी राजा नैण से प्रेम भरी बात कर ही रहा था कि बाहर पुजारी ने आवाज दी|
राजा बोला,"रे नैण,मेरी साख खतरे मे हैं|तु मुझे बचा ले|"
नैण बोली,"मैं तो आपकी बांदी हूँ|आपको अपना देवता बना अलमारी मे बिठा देती हूँ|कोई पहचान न पायेगा|"उसने राजा के मुँह मे मिट्टी पोत उसे भी अलमारी मे बिठा दिया|
अंत मे जब पुजारी आये तो अलमारी मे बैठे लोगों को उसने देख लिया|
"ये सब कौन, कन्या?"पुजारी ने पूछा|
"महराज, ये देवता लोग है"नैण बोली|
उन सबको एक दूसरे की उपस्थिति का भान हो गया और वे लज्जित से आगे पीछे भाग निकले|
सबके भाग जाने के बाद नैण अपने पति के पास आयी|अपने पति के लिए प्यार से भोजन परोसा|फिर बोली,"देखा, ये सारे तुम्हारे हितैषी कैसे चले आये|लेकिन"स्त्री चाला के आगे इनकी क्या बिसात?अब"स्त्री चाला" के बारे मे पुछे तो कह देना|मेरी स्त्री ने आपके मुँह पर मिट्टी पोत दीऔर स्त्री चाला कैसी होती हैं?"
नैण की चतुराई पर नाई गदगद हो गया|
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