प्रिय पाठकों,
आप सब के लिये देश-विदेश की अनुठी लोक-कथाएँ लेकर प्रस्तुत हुई हूँ|उम्मीद करती हूँ मेरा ये प्रयास आप सबको रूचिकर लगेगा|बड़ी लोक कथा दो भागों मे प्रस्तुत की जायेगी|
स्त्री की चाल
एक राजा था जिसकी हजामत बनाने एक नाई आता था|नाई की पत्नी नैण अपूर्व सुदंरी थी|एक बार वजीर ने नैण को देखा तो देखता ही रह गया|
नाई की अनुपस्थिति मे वजीर ये बात राजा के कान मे उड़ेल आया,'हे प्रभु!!स्त्रियां बहुत देखी पर नैण से तो नजर नही हटती|उसे तो आपकी होना चाहिए"
राजा तो सांमत प्रवृत्ति का था ही|श्रृवण मास से ही वो नैण पर मुग्ध हो उठा| और उसे पा लेने को आतुर|
वजीर का परामर्श आया,"महराज, नाई को कही बाहर भेज दे| तभी नाइन को फुसला पायेंगे|"
राजा ने नाई को आदेश दिया,"मुझे "स्त्री चाला"की सख्त जरूरत हैं|जहाँ कहीं मिले,ले आओ|मुझे तुम पर पूरा भरोसा हैं|"
नाई बेचारा सीधा-सरल|वो तो',स्त्री चाला "के बारे मे भी कुछ नही जानता था|वो उदास सा घर पहुंचा|नैण ने कारण पूछा तो नाई ने सारी कहानी बता दी|
नैण बोली,"तुम क्यों परेशान होते हो?राजा से जा कह दो कि स्त्री चाला तो मैं ले आऊँगा पर बदले मे मुझे चार करोड़ चाहिए होगे|"
नाई राजा के पास जा चार करोड़ ले आया|
नाइन ने रूपये संभाल कर रख लिये और अपने पति को छुपा दिया|फिर सज-संवर गाँव घुमने लगी|
रास्ते मे चौकीदार मिला,"प्रिय, तुम कहाँ जाती हो"?
"मेरे पति को राजा ने स्त्री चाला लाने को कहा है| वही लेने गये हैं||मैं अपने परिचित के यहाँ जा रही हूँ|"
चौकीदार बोला,"घर अपना ही अच्छा होता हैं|पहरेदार को छोड़ अन्यत्र क्यों जाती हो|रात मैं ही तुम्हारे घर आ जाऊंगा"
नैण अच्छा कह आगे बढ़ गयी|
आगे जाने पर नंबरदार मिला|उसने भी यही बात कही|आगे उसे वजीर, राजा,पुजारी मिले|सबने वही बात दोहराई|नैण सबसे अच्छा कह मुस्कुराते आगे बढ़ गयीं|
आगे की कथा कल ले उपस्थित होती हूँ|
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें