बंगला लोक कथा

एक छोटे से गांव में पेरू नाम का युवक रहता था|वह पत्थरों को तोड़-तोड़ कर उनके छोटे-छोटे टुकड़े किया करता था|वह ईमानदार और कम पैसो में अपना जीवन यापन करता था|सबकी सहायता करने में उसे आंनद मिलता|
   पेरू की माँ काली पर आपार श्रृद्धा थी|लोगों की मदद करना उसे अच्छा लगता|
  एक दिन एक मजदूर ने कहा,"पेरू तु तो माँ काली का भक्त हैं|उनसे वरदान ले इस जीवन से छुटकारा क्यों नहीं माँग लेता|"
  दूसरा मजदूर बोला,"मुझे लगता हैं कि माँ काली की आराधना कर तु उनसे कोई भी वर माँगेगा वो अवश्य पूरा होगा|"
  सारे मजदूरो ने ऐसा कहा|तब पेरू बोला,"अरे!!मैं अपने इस जीवन से बहुत खुश हूँ|भला कहो तो जिस तरह हम और तुम इतने बड़े पहाड़ और पत्थर चुटकियों में काट लेते हैं वैसा कोई और कर सकता हैं क्या?"
   उसकी बात सुन मजदूर बोले,"तेरा कहना ठीक हैं पर दूसरों के घर बनाते-बनाते हम अपने घर कहाँ बना पाते हैं?

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