आखिरी किस्त

दो दिन बाद शलभ आया| सारी स्थिति जान सन्न रह  गया|मंजरी को ब्रेन ट्युमर था|🙅मंजरी को सिर मे तीखा दर्द होता था जिससे शलभ एकदम अंजान था|🙅🙅
   आनन-फानन मे मंजरी का ऑपरेशन हुआ जो सफल रहा|बिना मंजरी के घर एकदम अस्त-व्यस्त हो गया था|😘😘मंजरी थी तो सारा काम सुचारू रूप से होता था|ये अहसास बाप-बेटी को बखूबी हो रहा था|😘😘 शायद ये सीख देने के लिये ही ये मुसीबत आयी हो|😘😘
  मंजरी के माँ पापाऔर भाई सब पहुँच गये थे| उन्होंने आ घर संभाल लिया था|दिव्या को आज परिवार के मायने समझ आये थे|
       तकरीबन दो  हफ्ते रह आज मंजरी अपने घर वापस आ रही हैं|😘😘
   शलभ और शांतनू उसे लेने आये थे|"दिव्या सो रही थी सो उसे जगाना ठीक नही समझा|"शलभ कह रहे थे| घर आ कर भी सब सन्नाटे मे पसरा मिला|खिडक़ी के परदे तक नहीं खीचें गये थे|🎊🎊 कमरों मे अंधेरा पसरा था|
"घर के परदे तो हटा देती| पूरी मनहूसियत कर रखी है"मंजरी ने बाई को ही डपटा|🙅🙅🙅
"क्या दिव्या का मन आज भी नहीं पिघला?और कितने इम्तिहान देने होंगे उसे?"मंजरी का मन टीस उठा|😘😘
मंजरी जैसे ही अपने कमरे की ओर बढी सारा कमरा रोशनी से चमक उठा|🎊🎊सामने पूरा परिवार स्वागत के लिये खड़ा था|🎊🎊🎊दिव्या हाथ मे बुके लिए माँ के स्वागत के लिये खडी थी|😘😘😘😘
   दिव्या आगे बढ मंजरी से चिपक गयी|यही तो वो पल था जिसकी मंजरी कल्पना करती थी|😘😘😘
"माँ मुझे माफ कर दो|बहुत सताया हैं न मैंने तुझे?"मैं अब वही पुरानी बेटी बन रहूंगी आपकी"दिव्या सुबक उठी|🎊🎊🎊
"मेरी बच्ची, अब सब ठीक होगा"!!मंजरी कह उठी|😘😘
मंजरी और दिव्या देर तक एक दूसरे के गले लगी रही|😘😘😘दोनों की आँखों से आँसू की अविरल धारा बह निकली|जो बहा ले गयी सारे गिले-शिकवे|😘😘😘

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