दूसरी किस्त

यूँ ही खत्म हो जायेगा जाम की तरह जिदंगी का सफर,
कड़वा ही सही एक बार तो नशे में हो कर पीया जाये|

उन बुर्जुग का नाम बेनीसिंह हैं|जब बोलना शुरु किया तो लगा जैसे वे अपने मांझी में डुब-उतरा रहे हो| रोज जैसे उस सब को जिया हो |होते हैं न कुछ जख्म जो नासूर की तरह जीवन भर टीसते हैं|
      बेनीसिंह उस समय कच्ची उम्र के ही तो थे जब ये सब घटा था उनके साथ|  बेनीसिंह के बाबा भूमिहर किसान थे| मेहनती थे सो कई खेत की किसानी मिल गयी थी उन्हें| बेनीसिंह आराम पंसद थे| ज्यादा मेहनत उनकी नीयत में थी नहीं| काम था नहीं सो दोस्तो की टोली में रमे रहते| दोस्त भी कैसे चापलुस किस्म के|
      गाँव की इकलौती परचून की दुकान थी| दुकान मालिक बुढौंती की लाठी पकड़े थे|आये दिन बिस्तर पकड़े रहते|घर चलाने के लिये दुकान का चलना जरुरी था| सो ये भार उनकी बिटिया को लेना पड़ा|
       बेनीसिंह अक्सर उस दुकान पर रुकने लगे| रोज-रोज के मिलने का नतीजा रहा| कि दोनो के बीच प्यार का अंकुर फुट पड़ा|साथ जीने मरने वाला|
     जब दोनो ने शादी करने का फैसला लिया तब दोनो के परिवार खिलाफ थे| एक ही गाँव के लड़का-लड़की भाई-बहन माने जाते थे| पञी-गोञ का भी झंझट न पलता| पर कुछ बेनीसिंह की जिद चढ़ आयी , कुछ परिवार के इकलौते लड़के का रुतबा, बाबा मान गये| पंचायत पर खासा प्रभाव था उनका| सो, आनन-फानन में दोनो की जन्म-पञी भी मिल गयी| शादी हो गयी|
     समता, बेनीसिंह की महरारु ने एक बेटी को जन्म दिया| परिस्थिती तभी तेजी से बदली| पहला बच्चा वो भी लड़की| उसे तो खत्म करने की बात उठने लगी| अपनी महरारु के कमजोर शरीर को किसी तरह ढोते, नवजात बच्ची को गोद में लिये बेनीसिंह ने रातो-रात गाँव छोड़ दिया|
      बेनीसिंह के बाबा ने जो कट्टरता उसके ब्याह के समय नहीं दिखायी, अब दिखाने में आ गये| शायद उनकी आन पर बन आयी थी| बेनीसिंह और उसकी मेहरारु को ढुंढ निकालने के सारे जतन बेकार गये| बेनीसिंह अपने गाँव से दूर शहर जा बसे थे|
     बेनीसिंह ने ही बताया कि अपने  छोटे से परिवार को बचाने के लिये कितने जतन करे थे उन्होने|कितने दिन फाको पर भी गुजारे, इस डर से कि मजूरी के लिये बाहर निकलने में कोई पहचान न ले|
     जब बिटिया बड़ी होने लगी| तो बेनीसिंह भी निशिंचत हो गये| फिर इतने सालो की बात, घर वालो ने भी अब माफ कर दिया होगा| बस यहीं बेनीसिहं चुक गये शायद|
  
गरीब-ए-शहर फाके स् मर गया आरिफ,
अमीर-ए-शहर ने हीरे से खुदकुशी कर ली|

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