कई दिनो तक दोनो तरफ से सन्नाटा बना रहा| इस बीच " मैडम" ने जो एक शानदार काम किया वो ये कि नेहा के फेसबुक अंकाउट में जा उसके तकरीबन सारे करीबियों को फ्रेडंशिप रिकुयेस्ट भेज दी| कमाल ये भी हो गया कि सबने मान भी ली|
नेहा को सब खबर लग रही थी| पर उसका दिल तो बहुत बड़ा था| शायद इस तरह वो अपने रिश्तो को परख रही थी| शायद इतने सालो की तपस्या का परिणाम देखना था उसे| क्या अपने साथ सबको नेहा कसौटी में कस लेना चाहती थी?
उसके बाद स्नेहा के तीन चार बार फोन आये| कई बाते हुई| उसके पति एक निहायत ऊँते पद पर आसीन थे|पर स्नेहा की बातो से लगा कि उसके स्वभाव में स्तुंष्टि जैसे भाव का अभाव हैं| जो मिला उसकी कद्र नहीं और जो नहीं मिला उसे पा लेने की लालसा| पति और बच्चों से उसे हमेशा शिकायत रही, ऐसा नेहा को लगा|
उसके बाद परिस्थितियों ने ऐसी करवट बदली कि नेहा की बिटिया की शादी तय हो गयी| इकलौती बिटिया को बहुत नाजो से पाला था नेहा ने| और उसी अंदाज में वो उसकी शादी भी करना चाहती थी|
जाने क्यों स्नेहा को शादी में बुला लेने का उसे बिल्कुल मन न किया| दो महीने तक नेहा की तरफ से कोई बात न हुई| फिर आगे से स्नेहा का फोन आ गया एक दिन|
"ये तो हाथ धो पीछे ही पड़ गयी" नेहा को खीज हो आयी पर ये सारे तमाशे तो उसके खुद के शुरु किये हुये थे|
बड़ा इसरार कर उसने नेहा से मिलने की इच्छा जतायी| नेहा के मन में भी था तो कि एक बार रुबरु देख ही लिया जाये|उसकी ये ललक उसे दिल्ली खींच ले गयी| कहने को तो वो शादी में गई पर असल में वो स्नेहा को एक नजर देख लेना चाहती थी|
व्योम की भी इत्छा बनी ही थी कि' अब कैसी दिखती होगी"? पोपले मुँह वाली उम्र से तो अभी नहीं गुजर रहे थे|
नेहा मय पति के उसके सामने हाजिर हुये| उस दिन नेहा ने इत्मीनान से बैठ अपने को संवारा| किसी बात में उन्नीस नहीं ठहरना था उसे| एक नारी सुलभ ईष्या थी या व्योम की सुदंर पत्नी होने की ललक!!!!
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