पांचवी किस्त

सुमि का मन जाने को बिल्कुल तैयार न हुआ| न जाए तो ही अच्छा|पर पल्लव ने सारे सहपाठियों का आना जरुरी कर दिया| मधु से उसने सुमि-रिया को खास तौर पर आने को कहा| रिया का नाम तो जबरदस्ती लिया गया| दरअसल सुमि आ रही हैं ये वो पक्का कर लेना चाहता था|
   सुमि-रिया सुन समझ गयी कि शैतानी तिकड़ी का प्रकोप वो भुला नहीं पाया हैं|सुमि तो मन ही मन प्रार्थना कर बैठी कि बस ये मौका बीत जाये फिर वो कभी भी नहीं जायेगी|
   सुमि के दो मन हो गये जाये या न जाये| मधु का बहुत दवाब बना था| जाने आने के लिये कितनी कसमें दे डाली|
   उधर चाची की सख्त ताकीद थी| कि १० बजे के पहले घर पर हाजिरी लगनी ही हैं| सुमि के पार्टी पर जाने की खबर से उनके बड़बड़ाने में तेजी आ गयी थी| पर ये मुद्दा तो अलग था| पहले वो पार्टी में जा बिना रोये-धोये वापस आ जाये वही बहुत था|
     इन सब बातो से अलग सुमि भी पल्लव से एक बार तो मिल ही लेना चाहती थी| वो भी एक नजर तो देखना ही चाहती थी कि पल्लव में कितना बदलाव आ गया हैं|
         अब तक जो काम सुमि ने न किये वो सारे आज कर डाले| चाचा की दोनो लड़कियों ने मिल सुमि को पार्टी के लिये तैयार किया| तैयार हो जब उसने अपने को देखा तो एकाएक खुद को ही नहीं पहचान पायी| उसका रुप कितना तो निखर आया था|
     तय हुआ कि सुमि-रिया साथ ही पार्टी में जायेगी| ऐसी बड़ी पार्टियों में वैसे भी सुमि को खुब हिचक होती थी| उनकी lifestyle में वो अपने को असहज महसुस करती थी|
     सुमि को देख रिया चिहुंक उठी," क्या गजब ढा रही हैं लाडो| आज तो बिजली गिरने वाली हैं| खास तौर  पल्लव पर|"
  " धत्!!! कुछ भी बोलती हैं|" कह सुमि का चेहरा लाज से दोहरा हो गया|
इतने सालो बाद तो सुमि के एकरस जीवन में कुछ अलग, कुछ अच्छा हो रहा था| सुमि के खिले चेहरे को देख चाचा खुश थे|
     जब दोनो पार्टी में पहुँची तो पल्लव उन्हीं का इंतजार करता मिला|

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