अवनी ने आधा पैसा अपना और आधा बैंक से कर्ज लेने का सुयश को सुझाव दिया| बैंक से कर्ज लेने पर भारी-भरकम ब्याज भी देना पड़ता|
कंपनी नयी होती और रिस्क फैक्टर ज्यादा| पर सुयश मेहनती और महत्वाकांळी दोनो था| अगर भाग्य भी साथ दे तो अवनी और सुयश इस कंपनी को बुलंदी तक ले जाते|
अवनी का मन देखते सुयश ने आधा पैसा बैंक से ले लेने का आवेदन दे दिया| पर अवनी भी गल्त न थी सारा पैसा एक नयी कंपनी में लगा अपने को खाली कर लेना कहाँ की अक्लमंदी थी? अवनी का अनुभव सुयश से ज्यादा था|
सब कुछ सुचारु रुप से हो गया| नयी कंपनी सुयश ने अवनी के नाम पर ही खोली| यही नहीं उसने ६०-४० की पार्टनरशिप रखी| अवनी का ६०% होल्ड था|
अवनी ने देखा तो सुयश का अपने प्रति ये लगाव देख गदगद हो गयी| उसने तय किया कि बचे हूए पैसे दोनो के आड़े वक्त के लिये रखेगी| जैसे सुयश उसे अपनी जिम्मेदारी मानता हैं वैसे ही वो भी सुयश को अपनी जिम्मेदारी मानेगी|
अब तक के कड़वे अनुभव ने जो उसे इतना निर्मोही बना दिया हैं उसमें थोड़ी ढील तो देनी ही होगी उसे| सारे इंसान एक से तो नहीं होते| कुछ अपवाद भी तो होते हैं|
अवनी ने धन्य समझा कि ऐसा ही एक शख्स उसकी जिदंगी में हमेशा के लिये चस्पा हो गया हैं|
कंपनी खुली और अवनी- सुयश के एक दूसरे के साथ से कुछ वर्ष के भीतर एक नामी-गिरामी कंपनी बन कर उभरी|
मुबंई जैसे महानगर में जहाँ सुयश जेब में माञ कुछ रुपये और आँखो में ख्बाब सजाए आया था| आज करोड़ो की कंपनी का मालिक बन गया हैं|
शादी की हर सालगिरह पर दोनो उस बस- स्टैडं जरुर जाते हैं जहाँ से उनकी ये कहानी शुरु हुई थी| ये भी इरादा मजबूत करने की जो प्यार यहाँ पनपा वो हमेशा बना रहे|
इति
प्रिय पाठको,
परिवार में हुई एक दुःखद परिस्थिती के चलते अगले १४ दिन कोई रचना प्रेषित कर पाने में असमर्थ रहूगी| आप सबको हुई असुविधा के लिए खेद हैं|उम्मीद करती हूँ आप सब अपना सहयोग बनाये रखेगे|
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