जबसे मेरे लफ्ज आइना बने हैं,
लोग मुझसे दूर रहने लगे हैं|
आपकी तरह आपके लफ्ज भी कीमती हो गये,
प्यार न सही शिकायत ही कर दो|
जख्म देने की आदत पुरानी हैं,
बहलाकर दर्द देने की आदत पुरानी हैं
बदले हम नहीं बदले आप हैं,
मुझे भूल जाने की आपकी आदत पुरानी हैं|
बंया हो गए, अल्फाज थे मेरे,
बंया न कर पाए,जज्बात थे मेरे,
कभी बंया ही न कर पाए जो,
वे ही तो अहसास थे मेरे
महज लफ्जो पर बात रुकी,
उनका इकरार था मेरा इंतजार|
अति सुन्दर पंक्तियाँ।
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