माँ ने जिस मौके के इतंजार में बैठी थी वो आया नहीं| या तो वे कुछ ज्यादा सोच गयी थी या फिर राहूल ही पहले से ज्यादा सचेत हो गया था|
श्रीमती पोरवाल ने राहत की सांस ली| राहूल की शादी के तो कितने ही सपने संजो रखे थे उन्होनें मन ही मन| पर शादी अपनी बिरादरी में ही करवानी होगी| अब तक उनके मायके ससुराल मे किसी ने भी बिरादरी से अलग रिश्ता कर लेने की हिम्मत नहीं जुटायी थी| फिर उनकी ओर से कैसे पहल होती|
एक बड़ी चुक तो हुई ही थी श्रीमती.पोरवाल से| उन्होने अपने बच्चो को कभी बिरादरी की रिश्तेदारी या रीती-रिवाजो में घुलने ही कहाँ दिया था|सो, बच्चो में बिरादरी वाली भावनाएँ सर ही नहीं उठा पायी|
राहूल का m.d लगभग खत्म ही हो गया था| उससे पहले ही उसे एक बड़े अस्पताल में नौकरी मिल गयी|माँ की तो खुशी का ठिकाना न रहा|बेटा अब डा़ राहूल हो जाएगा|खुशी में ही सारे जानने वालो में मिठाई बटंवा दी थी उन्होने|
वही राहूल आज इस गोधूली में देहरी से परे खड़ा डोर-बेल बजा रहा था|आज उसे काफी देर हो गयी थी| माँ की आँखे ताक रही थी दरवाजे की ओर|राहूल आया तो माँ ने लपक कर दरवाजा खोला|
दरवाजा तो खुला पर उनकी किस्मत के दरवाजे बंद करता हुआ| सामने राहूल खड़ा था| गले में बड़ी सी माला डाले| माँ की बुध्दि कुदं हो गयी थी| समझ तब आया जब राहूल के पीछे खड़ी युवती सामने आयी| गले में माला डाले| सभंलने में बहूत वक्त लगा श्रीमती पोरवाल को|
राहूल शादी कर आया बिना उनकी इजाजत के? यही धक्का उनके लिए बहुत बड़ा था| आज राहूल "mom boy" के खोल से निकल गया था| राहूल के ऊपर उनके अधिकार ळेञ में बिना उनकी इजाजत यूँ दाखिल हो जाए ये बात उन्हे अंदर तक तोड़ गयी|दूसरे जिस राहूल के बूते उन्होने अपना मकान खड़ा करना चाहा उसकी तो नींव ही खोखली निकली|
राहूल ने ही किसी तरह बताया कि मोना उसके साथ ही पढ़ती हैं|और पंजाबी हैं| माँ को एक के बाद एक झटके लग रहे थे| उन्होनें हाथ के इशारे से राहूल को चुप हो जाने को कहा| वही इतंजार करने को कह अदंर जा आरती का थाल ले आयी| एकदम यंञवत| दोनो की आरती उतार घर में बुलाया|
बाद में सारी बिरादरी को बुला एक आयोजन किया| पर ससुराल पळ से छोड़ो मायके पळ से भी कोई नहीं आया| इससे बड़ा सदमा श्रीमती. पोरवाल के लिए क्या होता|
समय तो अपनी गति से चल रहा हैं| बहू का स्वभाव अच्छा हैं|पूरा मान देती हैं उन्हें|एक पोता भी गोद में खेलने लगा हैं उनके| इस वजह से उनके शिकवे काफी हद तक धूल गये हैं|
जीवन फिर वापस आ गया हो जैसे|
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