पाचवीं किस्त

मैम ने हौले से उसके सर पर हाथ रख दिया|सहमति हो जैसे उनकी कविता से|
जब कविता अपनी सीट पर आ कर बैठी तो पलक ने उसकी तरफ जो देखा तो पलक की आखों में आँसु डबडबा रहे थे| दोनो ने एक दूसरे का हाथ थाम लिया|जैसे ये कह रही हो कि आज से हमारी दोस्ती एकदम पक्की वाली हैं|
  पर पलक को ये शिकायत रही कि इतनी बड़ी बात क्यों कविता ने उसे नहीं बतायी|
अगले दिन english मैम की क्लास न थी पर वो आयी क्लास में एक बड़े बैग के साथ| जिसमें कविता के लिए साल भर की कॉपियाँ थी| आज से तुम्हारी पढाई लिखाई मेरी तरफ से| पर कविता ने इंकार कर दिया मैम से कुछ भी लेने को|
मैम जो ये सब मैं घर ले गयी तब पापा को पता चल जाएगा कि मैंने आपको सारी बात बता दी हैं| और नयी माँ सारी कॉपियाँ उसके छोटे भाई के लिए रख लेगी|
  मैम ने कहा,' तुम घर लेकर ही नहीं जाना| मेरे cupboard में रख लेना सब|'जो मैम ने यह कहा तो कविता भूल ही गयी कि वो क्लास में खड़ी हैं|एकदम मैम के पैरो की तरफ झुक गयी|मैम ने उसे अपने से चिपटा लिया एकदम अपने बच्चे की तरह|
पलक की आँखो से लगातार आंसू बहे जा रहे थे| अपनी दोस्त के लिए खुश थी बहूत|कविता के लिए कुछ भी करेगी वो|

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