आखिरी किस्त

दीपा राहूल की तरफ मुड़ ही गई|राहूल सीधे आँखो में नहीं देख पाया उसके|
   एकाएक ही वो कह उठा'मैं आपको पसंद करता हूँ | क्या आप मुझसे शादी करना चाहेगी|'
   एक सासं में ही जैसे बात खत्म करना चाहता हो अपनी|फिर उसने सिर उठा दीपा का मन परखना चाहा हो 
      दीपा को मानो अहसास हो इस बात का|शांत बनी रही वो देर तक|राहूल के लिए ये पल बहूत भारी हो उठे| सब कुछ दावं में लगा था उसके|दीपा की चुप्पी उसे असहनीय हो उठी| पर उसे लगा की जीवन का ये अहम फैसला वक्त तो चाहता ही होगा|
  जो कल पर बात टालने की गरज से उसने मुँह खोला की दीपा बोल उठी|
  'क्या आपको पता है मेरे अतीत के बारे में कुछ|इस समय मैं वो बाते नहीं उधेड़ना चाहती|पर जो कुछ हुआ वो मेरे और अशुं दोनो के लिए ही बहूत पीड़ादायक था|मुशकिल हूई उन सब से उभरने में|मानती हूँ अकेली माँ होना कितना मुशकिल है|मगर हमने ढाल लिया है काफी हद तक अपने को| अब और भटकना हमें मजूरं नहीं|
    राहूल सुनता रहाचुपचाप|आत्मसात् कर रहा हो जैसे सब कुछ|उसे दीपा की तकलीफ का अहसास था|इतने दिन साथ जी थी ये तकलीफ बिना दीपा को अहसास दिलाए|
     राहूल थोड़ी देर दीपा को देखता रहा मानो अपने कहे को तौल रहा हो|फिर उसने कहना शुरु किया
     'दीपा मुझे अदांज है आपके हालातो का| गुजर चुका हूँ मैं भी इन सबसे|
     दीपा हैरान हूई क्या आप भी...........
     राहूल बोल उठा'नहींअभी मेरी शादी नहीं हूई बल्कि मैने शादी करनी ही नही चाही अब तक|मैनें भी अपने माँ-बाप का अलगाव झेला हैइससे मेरी माँ किस हद तक टूट गयी थी ये देखा है मैनें भी|
   उस दिन जब मैने़ं अशुं से पुछा था उसके पापा के बारे में तब वो दर्द बहूत अपना लगा मुझे|मुझे आपका अतीत नहीं कुरेदना| नहीं देना चाहता आपको और तकलीफ|बस आप कर सको तो इतना विश्वास जरुर दिलाना चाहूँगा कि जीवन में आपको और अशुं को कोई तकलीफ नहीं होने दूगां|कल का इतंजार करुगाँ मैं|
    दीपा का मन मानो बहूत हल्का कर गयी राहूल की ये बाते|उसकी बातो में कोई बनावटीपन नहीं देखा दीपा ने|
      दीपा ने कहा 'जो कल भी जवाब नहीं दिया तो'
    तब भी मैं आपका और अशुं का वैसा ही ध्यान रखुगा जैसा रखता आया हूँ|
    बस राहूल का ये जवाब दीपा को भीतर तक छु गया| न चाहते हूए भी तुलना कर बैठी साहिल और राहूल में| कितना अतरं  है दोनो की सोच में|
     बस अब और नहीं चला जाता अकेले| जिदगीं मिली है उसेफिर से जी लेने के लिए| नहीं जाया होने देगी| आगे बढ़ ही चली दीपा अपने नये जीवन का हाथ थामने| राहूल के रुप में|
                                इति

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