कभी इंकार कभी इकरार
कभी दूरियाँ दरमियान
कभी नजदीकियो की दरकार
कभी दूरियो का ऐहतराम
कशमकश क्यो है इतनी
कहीं उन्हे मुहोब्बत तो नहीं

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