अतिंम किस्त

|प्राचीर खड़ा तीनो को जाते देखता रहा|हाथ मलता रह
गया कर कुछ न पाया|
    तीनो वापस आ गये और तबसे मौन सन्नाटा पसरा था घर में|अलका को गहरा आघात लगा था | माँ- पापा भी कहाँ अलग थे इससे पर अलका के आगे स्रब बांध रखा था|
    अलका को भी अहसास था माँ -पापा के प्यार का|मगर वो अभी किसी को भी ढाढ़स बधांने की स्थिती में न थी|पापा जो कभी ऊँची आवाज में न बोले थे केवल उसके लिए ही तो भिड़ गये थे प्राचीर से|
        दूसरे दिन सवेरे ही दस्तक हुई दरवाजे पर| जो माँ ने दरवाजा खोला तो सामने विधी खड़ी थी| माँ खुश हो उठी अलका का सोच कर|
   सस्नेह अंदर ले आयी उसे' आज सुबह कैसे'|
' बस ने जल्दी पहुँचा दिया' विधी बोली
माँ ने हाथ रख दिया उसके सिर पर दुलार से' तू नहा-धो ले मैं चाय नाश्ता तैयार कर दूं|'
    नहा -धो कर विधी एकदम तरो-ताजा लग रही थी| जो उसने अलका का पुछा तो माँ यही बोल पायी' अपने कमरे में सोयी हैं| देर तक जागी है रात को'
   विधी को देख माँ को अजब सुकून मिला| उसके चेहरे पर गजब का सुकून था|
    अचानक विधी को अपने सामने देख अलका निहाल हो गयी | उसके गले लग देर तक रोती रही| विधी ने इतजांर किया| जब अलका कुछ शांत हूई तो विधी ने लगभग उसे झिड़कते हुए ही कहना शुऱु किया' ये आँसु किसके लिए बहा रही है| जिसने केवल ठोकर दी| क्या वो इतना हावी हो गया तेरे ऊपर कि तूझे अपनो की आँखो का दर्द भी बिसर गया| देखा तूने अपने माँ पापा को| कितने टूट चुके है वे|
    मुझे देख मैनें ठान लिया है कि मैं अतीत की कोई परछाई नहीं हावी होने दूंगी अपने ऊपर|  मुझे शुरु से बच्चो को पढ़ाने का शौक था सो इसी दिशा में आगे बढ. मैनें छोटीसी पूँजी लगा एक कोचिंग सेन्टर खोला हैं| पढ़ने में तू भी कितनी अव्वल थी| क्या वो सब तिरोहित हो जाने देगी| गर तू भी बराबर का साथ दे तो जरुर ये कोचिंग सेन्टर चल निकलेगा|
  मत बरबाद कर अपना जीवन इस तरह| अब तुझे केवल अपने लिए नहीं वरन् आने वाले मेहमान के लिए भी सोचना हैं| क्या सारी जिदंगी माँ -पापा पर बोझ ही बने रहना हैं|
      अलका की तरफ से कोई जवाब न पा विधी चलने को हूई| तभी उसे अपने कधें पर अलका के हाथ का कोमल स्पर्श महसूस हूआ|
   अलका कह रही थी' छंट गये है वो काले बादल जिसने ढक रखा था हम सबको इतने दिने तक| रोशनी की नयी किरण मेरा तन-मन विभोर कर गयी हैं|
  खुशी की अधिकता से वो विधी के गले लग गयी' तू ले आयी हमारी जिदगीं में एक नया सवेरा|
     पापा भी बोल उठे ' मेरी बेटियों मुझे गर्व है तुम दोनो पर| इस काम में मैं भी तुम लोगो का पूरा साथ दूगां|
      विधी का आना सब का भविष्य तय कर गया|
                     इति

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