दूसरी किस्त

|प्रिया के रेस्ट हाउस के आस- पास के लोग शांत,सौम्य और मदद करने वाले थे|उसे अपने कामो से जब भी फुरसत मिलती यहाँ चली आती| कभी सुहास के साथ कभी अकेली|
   सुहास प्रिया के पति थे|  ऊँचे ओहदे पर आसीन|ऊँचा पद था तो ऊँचे लोगो के साथ उठना बैठना भी था|अक्सर देर रात की पार्टी होती|नहीं पसंद था प्रिया को ऐसा जीवन|सुहास नहीं था पहले ऐसा मगर पद का मद चढ़ गया था उस पर| उसका रूतबा बढ़ा और दायरा भी|
  ऐसी ही एक पार्टी में उसकी तमस से मुलाकात हुई|तमस एक रईस खानदान से ताल्लुक रखता था|ये जानते हुए भी कि प्रिया शादी- शुदा है तमस आसक्त हो गया उस पर|अमीरी ने उसके अदंर सब चाहा पा लेने का अहम जो भर दिया था|नहीं भाया प्रिया को तमस|उसकी नजरो का ताव नहीं सह पाई|
     पूरी पार्टी में आस - पास ही मड़राता रहा तमस उसके|प्रिया को उसकी बदनीयती का गुमान हो चला था|मगर सुहास पर तो जैसे जादू चढ़ गया था तमस का|प्रिया ने दूरी बना लेनी चाहीमगर तमस था शातिर तबीयत का| मौके निकाल लेता| कसमसा कर रह जाती प्रिया|
    ऐसे माहौल से जब वो उकता गयी तो थोड़े दिनो के बदलाव की सोच उसने रेस्ट-हाउस जाने की ठानी| जब रेस्ट हाउस के लिए निकली तो तमस दुसरे रास्ते से उसी के घर आ रहा था| प्रिया को निकलते देख लिया उसने|

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