जीत

जीत

वो किताबे लेकर तो बैठी थी पर दिमाग सुन्न था| माँ सख्त बीमार थी| किडनी में संक्रमण फैल रहा था| डाक्टर ने डाईलिसिस के लिये कह दिया था| आज तक ऐसे ही कठिन वक्त पर माँ ही सर पर हाथ फेरती थी मगर आज वो हाथ बेजान से बिस्तर पर पड़े थे| 
   अगले दिन ही तो प्री-बोर्ड शुरू थे| माँ कितना हौसला बढ़ाती थी!! उसके पेपर ठीक नहीं हो रहे थे| उस दिन पापा ही स्कूल से उसे लेने आये थे| उसका उतरा चेहरा देख पापा सब समझ रहे थे|
"तुम्हें पता है जब मैं आठवी में था, तुम्हारे बाबा गुजर गये थे| मैं बिल्कुल टूट गया था| पर फिर माँ ने एक दिन कठोर हो कहा कि " मर गये लोगो के साथ मरा नही जाता| अगर तुमने ही हिम्मत खो दी तो उनका सपना कौन पूरा करेगा| और फिर मैं दिमाग से जी उठा| मन वही बाबा के पास रख कर| आज बाबा जहाँ कही भी होगे, गर्व कर रहे होगे| "
   उसने सुना और शांत रही|
" तुम्हारी माँ जब ठीक हो जायेगी तो तुम उन्हें ये नहीं बताना चाहोगी कि उनकी बेटी उनके ऊपर ही गयी हैं| और उनकी तरह ही हर परिस्थिति से लड़ कर जीत सकती हैं|"

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