आज नेहा के पति की आँख देर से खुली| घड़ी की ओर देखा और हड़बड़ाकर उठ बैठे|
" घुमने के लिये आज देर हो गई|चलो थोड़ी देर के लिये ही सही घुम कर आता हूँ" व्योम बोला|
नेहा की हाँ न का इतंजार किये बैगर वो अपने दैनिक कामो से फारिग होने बाथरुम में घुस गया| नेहा भी जानती थी कि मना करने का फायदा कुछ होगा नहीं इसलिये चुप चाप अपने काम में व्यस्त हो गयी| बीच बीच में बड़बड़ भी जारी थी|
"आजकल जनाब के ऊपर स्लिम-ट्रिम होने का बड़ा भुत सवार हैं| जैसे फिर से शादी करनी हैं?"
बाथरुम से निकल व्योम सैर करने चला गया| आज जनाब अपना मोबॉइल घर पर ही भुल गये|
अपने काम में व्यस्त नेहा का अचानक मन हुआ कि क्यों न आज व्योम के मोबॉइल में ताक-झांक की जाये| आजकल मोबॉइल से कुछ ज्यादा ही चिपके भी रहते हैं| देखु तो जनाब की जिदंगी में चल क्या रहा हैं?
कुछ नारी सुलभ इच्छा के वशीभुत नेहा ने व्योम का मोबॉइल उठा लिया|नेहा यूँ ही देखती जा रही थी| फिर सोचा चलो एक बार इनकी फेसबुक पर भी नजर मार लू|
फेसबुक जो खोली तो सर्च के स्टेटस में जाने कितनी बार स्नेहा नाम को खोजा गया था| नेहा को माजरा समझ नहीं आया| पहले उसने सोचा कि व्योम से ही पुछ लुँ फिर सोचा ," नहीं पहले अपने स्तर पर देखती हूँ|" नहीं मिलेगा तो व्योम से पुछुगी|
शक सिर इसलिये भी सर नहीं उठा पा रहा था कि अब दोनो की उम्र इस खिलदड़े पन से ऊपर उठ गयी थी| और उनकी बेटी ब्याहने लायक हो चुकी थी|
पर मन के एक कोने को वो नहीं मना पा रही थी| व्योम घुम कर वापस आ गया था| नेहा सामान्य बनी रही| व्योम के ऑफिस जाते ही उसने सारा काम किनारे रखा और फेसबुक में जुट गयी|
उसने अंदाजे से शहर का नाम डाला| नाम तो वो अपने पति के मोबॉइल से ले चुकी थी मगर इस नाम की तो कई स्नेहा स्क्रीन पर उभर आयी| उसे कोफ्त हो आयी|शहर का नाम डाल कर काम नहीं चला तो अब क्या गली-चौबारे का नाम डाल कर खोजे| अगर ऐसा हो पाता तो इस वक्त वो ये भी कर लेती|
काम न बन पाने की बैचेनी उस पर तारी होने लगी| अब तो व्योम से ही पुछना पड़ेगा| व्योम के शाम तक लौटते वो बैचेन बनी इधर-उधर डोलती रही| आज तो किसी काम में उसका मन नहीं लग रहा था|
नेहा ने थोड़ी और अंक्लमंदी दिखाते उसका नंबर भी अपने पास लिख लिया| यही बात तो उसे बैचेन भी सबसे ज्यादा कर रही थी कि उसका मोबॉइल नबंर कैसे मिल गया इन्हें|
अब तो व्योम ही आ सब बातो का खुलासा करेगा|
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