बचपन की यादे सबसे मीठी होती हैं| बचपन के दिन कैसे भुलाये जा सकते हैं | एकदम निश्चल|
मेरी बचपन की पढ़ाई मध्यप्रदेश के एक महत्वपूर्ण शहर जबलपुर में हुई थी| अपने प्राकृतिक ' घाटो' के लिये मशहूर|
इनमें सबसे मशहूर 'भेड़ाघाट' था| जो अपनी संगमरमरी चट्टानो के लिये दुनिया भर में मशहूर हैं| आज आपको 'भेड़ाघाट' की सैर को ले चलते हैं| जबलपुर से २६ कि़मी दूर स्थित हैं ये स्थान|
भेड़ाघाट नर्मदा नदी में स्थित हैं| नर्मदा माते यहाँ के लोगो के बीच गंगा की तरह पूजनीय मानी जाती हैं| ये नदी किसी तरह भी अपवित्र न होने पाये इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता हैं| वाकई मैंने नर्मदा नदी को साफ पवित्र देखा| एकदम निर्मल, हरा जल|
यहाँ चप्पु की ही नाव चलती हैं| जो पर्यटको को नर्मदा नदी के दोनो ओर स्थित संगमरमरी दीवारो के मनभावन दर्शन करवाती हैं|मनोरम दृश्य होता हैं|
नाव में बैठते ही ठंडी बयार स्वागत करती सी लगती हैं| पानी में हाथ डालना चाह रही थी पर पानी में मगरमच्छ होने का भी डर होने से झिझक हो रही थी| हंलाकि आज तक इस पानी में मगरमच्छ नहीं देखे गये हैं|
दोनो तरफ संगमरमर की दीवारे और बीच में नर्मदा में गहराई की ओर जाते ऐसा लग रहा था मानो एक खुली गुफा में जा रहे हो| बहुत जादूई अहसास था| ऊपर से नाविक की दिलचस्प तरीके से इन संगमरमर में छुपे अनछुये पहलुओ का बताना, वातावरण को हल्का और मजेदार बना रहे था|
सबसे पहले एक तरफ पीले संगमरमर की चट्टाने देखी|ऐसा लगा जैसे ये निर्जीव पत्थर बोल उठे हो| एक जगह पत्थरो का कटाव गुलाब का फूल तो दूसरी तरफ हाथी की आकृति दर्शा रहा था|
जाने कितनी ही फिल्मो कि शूटिंंग यहाँ हो चुकी हैं| जैसे "जिस देश में गंगा बहती हैं',' "अशोका',' मोहनजोदड़ो' की शूटिंंग यहाँ हुई हैं| कहा जाता हैं कि इन फिल्मो को फिल्माते जाने कितने किस्से - कहानियाँ बने| जैसे इन चट्टटानों में एक जगह दोनो तरफ अनगिनत छोटे-बड़े गढ्डे दिखेगे| जो शूटिग फिल्माते गोलियों के निशान हैं| जैसे एक जगह चट्टान का रंग नीला था| गाइड ने बड़े दिलचस्प तरीके से इसे हीरोइन की साड़ी का छुटता रंग बताया| ऐसे अनगिनत वाक्ये बताये गये|
शुरु में पानी की गहराई २०० फीट बतायी गई जो बढ़ कर ६०० फीट के करीब हो गयी|आगे जाने पर चट्टानो का रंग भी बदलता गया| गुलाबी, नीली और एक जगह झक्क सफेद| इन चट्टानो को देखने का मजा चांदनी रात में ही आता हैं| उस दिन इन चट्टानो को देखने का अपना अलग मजा हैं|
आगे चलने पर एक जगह ' अंधामोड़' यानि'blind turn' आता हैं| जहाँ पता नहीं चलता कि अब जाना कहाँ हैं|
इसके आगे चलने पर'बंदर कूदनी' नाम की जगह आती हैं| यहाँ पानी की गहराई लगभग ६०० फीट हैं| कहा जाता हैं कि यहाँ चट्टाने इतने पास थी कि बंदर छलांग लगा लेते थे| पर अब समय के साथ ये दूरी बड़ी हो गयी हैं| यहाँ तक नाव ले कर आना वर्जित कर दिया गया हैं| क्योंकि पानी बहुत गहरा तो हैं ही साथ ही यहाँ जबरदस्त भंवर बनता हैं| कहा जाता हैं कि यहाँ नाव अगर भंवर में फंस गयी तो फिर निकल नहीं सकती|
चुंकि हमारे जाने के समय पानी का स्तर काफी नीचे चला गया था इस वजह से ये अनुपम दृश्य हम देख पाये|
हमारी भेड़ाघाट की ये सैर बेहद यादगार रही| कभी न भुल सकने वाली|
अंजू निगम
देहरादून
बचपन की यादे सबसे मीठी होती हैं| बचपन के दिन कैसे भुलाये जा सकते हैं | एकदम निश्चल|
मेरी बचपन की पढ़ाई मध्यप्रदेश के एक महत्वपूर्ण शहर जबलपुर में हुई थी| अपने प्राकृतिक ' घाटो' के लिये मशहूर|
इनमें सबसे मशहूर 'भेड़ाघाट' था| जो अपनी संगमरमरी चट्टानो के लिये दुनिया भर में मशहूर हैं| आज आपको 'भेड़ाघाट' की सैर को ले चलते हैं| जबलपुर से २६ कि़मी दूर स्थित हैं ये स्थान|
भेड़ाघाट नर्मदा नदी में स्थित हैं| नर्मदा माते यहाँ के लोगो के बीच गंगा की तरह पूजनीय मानी जाती हैं| ये नदी किसी तरह भी अपवित्र न होने पाये इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता हैं| वाकई मैंने नर्मदा नदी को साफ पवित्र देखा| एकदम निर्मल, हरा जल|
यहाँ चप्पु की ही नाव चलती हैं| जो पर्यटको को नर्मदा नदी के दोनो ओर स्थित संगमरमरी दीवारो के मनभावन दर्शन करवाती हैं|मनोरम दृश्य होता हैं|
नाव में बैठते ही ठंडी बयार स्वागत करती सी लगती हैं| पानी में हाथ डालना चाह रही थी पर पानी में मगरमच्छ होने का भी डर होने से झिझक हो रही थी| हंलाकि आज तक इस पानी में मगरमच्छ नहीं देखे गये हैं|
दोनो तरफ संगमरमर की दीवारे और बीच में नर्मदा में गहराई की ओर जाते ऐसा लग रहा था मानो एक खुली गुफा में जा रहे हो| बहुत जादूई अहसास था| ऊपर से नाविक की दिलचस्प तरीके से इन संगमरमर में छुपे अनछुये पहलुओ का बताना, वातावरण को हल्का और मजेदार बना रहे था|
सबसे पहले एक तरफ पीले संगमरमर की चट्टाने देखी|ऐसा लगा जैसे ये निर्जीव पत्थर बोल उठे हो| एक जगह पत्थरो का कटाव गुलाब का फूल तो दूसरी तरफ हाथी की आकृति दर्शा रहा था|
जाने कितनी ही फिल्मो कि शूटिंंग यहाँ हो चुकी हैं| जैसे "जिस देश में गंगा बहती हैं',' "अशोका',' मोहनजोदड़ो' की शूटिंंग यहाँ हुई हैं| कहा जाता हैं कि इन फिल्मो को फिल्माते जाने कितने किस्से - कहानियाँ बने| जैसे इन चट्टटानों में एक जगह दोनो तरफ अनगिनत छोटे-बड़े गढ्डे दिखेगे| जो शूटिग फिल्माते गोलियों के निशान हैं| जैसे एक जगह चट्टान का रंग नीला था| गाइड ने बड़े दिलचस्प तरीके से इसे हीरोइन की साड़ी का छुटता रंग बताया| ऐसे अनगिनत वाक्ये बताये गये|
शुरु में पानी की गहराई २०० फीट बतायी गई जो बढ़ कर ६०० फीट के करीब हो गयी|आगे जाने पर चट्टानो का रंग भी बदलता गया| गुलाबी, नीली और एक जगह झक्क सफेद| इन चट्टानो को देखने का मजा चांदनी रात में ही आता हैं| उस दिन इन चट्टानो को देखने का अपना अलग मजा हैं|
आगे चलने पर एक जगह ' अंधामोड़' यानि'blind turn' आता हैं| जहाँ पता नहीं चलता कि अब जाना कहाँ हैं|
इसके आगे चलने पर'बंदर कूदनी' नाम की जगह आती हैं| यहाँ पानी की गहराई लगभग ६०० फीट हैं| कहा जाता हैं कि यहाँ चट्टाने इतने पास थी कि बंदर छलांग लगा लेते थे| पर अब समय के साथ ये दूरी बड़ी हो गयी हैं| यहाँ तक नाव ले कर आना वर्जित कर दिया गया हैं| क्योंकि पानी बहुत गहरा तो हैं ही साथ ही यहाँ जबरदस्त भंवर बनता हैं| कहा जाता हैं कि यहाँ नाव अगर भंवर में फंस गयी तो फिर निकल नहीं सकती|
चुंकि हमारे जाने के समय पानी का स्तर काफी नीचे चला गया था इस वजह से ये अनुपम दृश्य हम देख पाये|
हमारी भेड़ाघाट की ये सैर बेहद यादगार रही| कभी न भुल सकने वाली|
अंजू निगम
देहरादून

Beautifully depicted. We too travelled with the author.
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