तीसरा भाग

हल्दीघाटी दर्रे से कुछ आगे जाकर एक गुफा पड़ती हैं| इसी गुफा में राणा प्रताप अपने वफादार साथियों के साथ मिलकर गुप्त मंञणा करते थे| आज भी वो जगह ज्यों की त्यों बनी हूई हैं|
     अपने जीवन के अंत तक राणा प्रताप ने अकबर के आगे घुटने नहीं टेके|
    हल्दीघाटी से वापस उदयपूर आते समय सड़क के दोनो ओर गुलाब के फूलो के अनगिनत पौधे मिले| पता चला ये पौधे साल भर फूल देते हैं| इन्हें " चैञी गुलाब" कहा जाता हैं| और ये अप्रैल के महीने में बोये जाते हैं|
    हल्दीघाटी के बाद हम लोग "सिटी पैलेस "की तरफ बढ़े|फतेहसागर झील से माञ ३ किमी दूर "सिटी पैलेस" बना हैं|
  उदयपूर का पूरा इतिहास मानो इसमें सिमट आया हो| प्रवेश फीस २६० एंव २८० रु क्रमंशः रखी गई हैं| चार मंजिला इस पैलेस के ठीक पीछे पिछोला झील दिखाई पड़ती हैं| और दिखायी पड़ता हैं " उदयपूर पैलेस"|
  इन मंजिलो में अपनी-अपनी खासियत लिये कई" collections" हैं| जैसे पहली मंजिल में उदयपूर के इतिहास के बारे में पूरा वर्णन था|एक बड़े फ्रेम में उदयपूर के तब से लेकर अब तक के सारे राजा के विषय में जानकारी दी गयी हैं|कहा जाता हैं कि राजा सग्रांम सिंह की कोई औलाद नहीं हूई अत: उन्होने दत्तक पुञ लिया| जो परिवार से ही लिया गया था|
       ये पूरा महल दो हिस्सो में विभाजित हैं| मर्दाना महल और जनाना महल| मर्दाना महल में एक विशाल हिस्सा उस समय प्रयोग में लाये गये शस्ञों को समर्पित हैं|
आज की "राजपूताना राइफल्स" के वंशजो ने ही उदयपूर के इतिहास में अहम भूमिका निभायी| जो अपने शोर्य और वीरता के लिए आज भी जानी जाती हैं| इसका भारतीय सेना में विलय १९.  में किया गया|
     मदार्ना महल में एक स्थान हैं|जिसमें "कुलदेवता" का मंदिर हैं| कहा जाता हैं कि किसी फकीर ने ये कहा था कि किसी भी युद्ध में जाने से पहले यहाँ पर माथा टिकाने से कभी भी राजा को हार का मुँह नहीं देखना पड़ेगा| और होता भी यही था|
      एक कमरे जो राजा का आरामघर था आज भी जस का तस बना हुआ हैं| राजा का बिस्तर सुंदर एंव नक्काशीदार बिछोने से ढका हैं| पढ़े की मेज- कुर्सी सब शालीनता से अपनी जगह जमे हुए हैं| कहा जाता हैं कि राजा सग्रांम सिंह का पैर चलने लायक नहीं थे| उस समय वे आज प्रयुक्त होने वाली " व्हील चेयर" में चला करते थे|
     उनका स्नानघर तक पाश्चात्य प्रभाव लिये था|
चौथी मंजिल जाने पर आपको पिछोला झील का विहगंम दृश्य तो दिखेगा साथ ही सेहन के बीचो-बीच फलता-फूलता छोटा सा बाग भी दिखेगा| उस समय चौथी मंजिल पर इस तरह बाग बनाना भी अपने आप में एक उपलब्धि हैं|
          कल "सिटी पैलेस" के कुछ और हिस्सो से रुबरु करवाते हैं|तब तक के लिए नमस्ते| आप सबका दिन शुभ हो|

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