आज दीना बाबू को एहसास हुआ होगा|कि कभी कभी मान की अधिकता न केवल रिश्तो में दूरियाँ ले आता हैं बल्कि कितने काम बिगाड़ देता हैं| इतना कि फिर उसे पटरी पर लाना कठिन हो उठता हैं|
चच्चा जान का अपने ऊपर जरुरत से ज्यादा भरोसा कर लेना उनकी नैया डुबोने वाला था| दीना बाबू की बेपरवाही टूट भी सकती हैं इसका जरा गुमान न था चच्चा को क्यों कि परख चुके थे दीना बाबू की बेरुखी|
बस चच्चा की यही चूक उन पर भाग्य के दरवाजे बंद कर चुकी थी|
दीना बाबू ने पिताजी को पूरा ब्यौरा दिया| उम्मीद न थी उन्हें कि उनके नमक पर पले उनसे इतनी नमकहरामी करेगे| पैसो की चमक इतनी बड़ी कि बरसो से जमाया विश्वास एकाएक भरभरा कर टुट गया| केवल उनके आदमी ही नहीं बल्कि उनका परिवार भी पिताजी के रहमोकरम से पलता था| सो केवल सिक्को की खनक से उनका ईमान डगमगाया हो ऐसा नहीं होगा जरुर चच्चा ने अपनी ताकत दिखायी होगी | उस पर भी बात न बनी होगी तो चच्चा के तरकश में तीरो की कमी न थी| जब पिताजी का मन डिगा दिया तो उन अदनो की क्या बिसात|
खैर , दीना बाबू ने पिताजी के कंधो पर हाथ रख जब ये कहा कि " अबसे साये की तरह मैं आपके साथ रहूंगा"पिताजी के बुझते जिस्म में नयी जान डाल गये|
इतंजार तो अब चच्चा के वापस आने का हो रहा था|दीना बाबू को लगा कि शायद ही अब इधर की सड़क पकड़े चच्चा| पर बिन पेंदी के लोटे के थे शायद अगली सुबह ही खींसे निपोड़ते हाजिर हो गये|
उन्हें कोई खबर ही न लगी हो ऐसा कम ही उम्मीद थी| पर शायद पिताजी की तरफ से अब भी आशावान थे|तभी पहले पिताजी के कमरे का ही रुख किया| दीना बाबू और अम्मा को खबर हो गयी थी चच्चा के आने की| इसलिए दोनो भी पिताजी के कमरे में बन आये|चच्चा लाख कहते रहे कि "अरे बचवा, हम तनिक भैया से मिल ले| तुम आराम कर लो" दीना बाबू और अम्मा कमरे में बने रहे| पिताजी का भी कुछ न बोलना चच्चा को यकीन दिला गया कि इस घर में उनके दिन पूरे हुए|
न पिताजी, अम्मा ने और न ही दीना बाबू ने एक भी शब्द उकेरा तो चच्चा किस बिना अपनी सफाई या उन्हें देख लेने की धमकी देते|
थोड़ी देर बैठे रहने के बाद अपना बोरिया-बिस्तर समेट वहाँ से चले जाना ही चच्चा को ठीक लगा|
पिताजी और दीना बाबू ने ये तय किया था कि चच्चा को चुप्पी के हथियार से ही चलता कर देगे| धोखाधड़ी का मुकदमा ठोकने से अदालत के कितने चक्कर काटने पड़ते इसका इल्म तीनो को था|
चच्चा मगर जाने अनजाने एक सबक तो दे ही गये थे कि आपस में बनाए न रखना कितना नुकसान कर जाता हैं| बाहर वालो के लिए महज तमाशा और चच्चा जैसे लोगो के लिए फायदा उठा लेने का सुनहरा अवसर|
इति
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