हालात की विड़बना भी क्या रंग दिखाती है|जो रेस्ट हाउस प्रिया को इतना भाया था उसका रास्ता तमस ने ही दिखाया था|यानि तमस का रेस्ट-हाउस था ये बात दीगर थी कि प्रिया अंजान थी इस बात से|न तमस चाहता था कि प्रिया वाकिफ हो इस बात से|सुहास को पता था या नहीं इस बात का सशंय था| परउसे ज्यादा क्या फर्क पड़ना था|
जो तमस ने प्रिया को निकलते देखा उसे एहसास हो गया कहाँ गई होगी अभी|दोपहर को चल शाम तक वो भी पहुँच गया रेस्ट हाउस|
जो प्रिया ने उसका आना देखा तो सिहर उठी एकबारगी|उस पर तमस की जहरीली हंसी काफी थी उसे खौफ दिलाने को|बस एक बिरजू का होना उसे राहत दिला गया|
आ चुका था तमस कई बार यहाँ सुहास के साथ|मगर इस बार सुहास नहीं था|तमस ने कई बार उठाना चाहा मौके का फायदा मगर बिरजू हर बार खड़ा रहा उसके साथ देवदूत की तरह|
चिढ़ सा गया तमस बिरजू से| बाहर का रास्ता दिखा देना चाहा पर प्रिया का मूहँ लगा था इसलिए चुप लगा गया|कभी और देख लेगे की सोच के साथ|
रात घिर आई थी और प्रिया का डर भी| खाने से फारिग होते ही प्रिया ने कमरा अच्छी तरह बंद कर दिया चारो ओर से|
तब से अब तक बैठी है वो अलाव के सामने|गहराती रात के साथ एक साया लहराता रहा खिड़की के पास देर तक| बिना कोई आवाज किए सांस रोके बैठी रही प्रिया देर तक| एक पर्स जो वो हमेशा अपने पास रखती थी ऐसे ही किसी मौके के लिए अपने पास खिसका लिया|नींद तारी होने लगी उसकी आँखो पर| तभी हल्की सी थपकी हुई खिड़की पर|प्रिया सजग हो गई| बिरजू था खिड़की पर बस ये इशारा करने भर को कि वो है यही आस-पास|
एक राहत मिल गयी उसे|फिर नीदं के किनारो ने कब घेर लिया उसे अहसास नहीं|
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