साझां की कुछ तस्वीरे,
यादो को कुछ पखं दीये,
निकल के आया बचपन मेरा,
सपने झुला चढ़ गये,
बचपन की वो बेफिक्, ,
यादो से बाते दो-चार हुई,
मिन्नते की बचपन से,
लौट आ मेरे जीवन में फिर,
बचपन बोला जो मुहँ फेर लिया,
अब न लौट पाऊँगा,
बचपन के तो लोग कई,
अतंर मन का आ गया
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Bahut sajeev yadein.
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