वो भी जमाना था,
जब साथ था चार का,
तकरार थी तो इकरार भी था,
मान था मनुहार थी,
फकत एक साथ था,
हम चार का,
अब न वो जमाने हैं,
न रंग पुराने हैं,
बेशक मजबूरियाँ हैं,
औ वक्त का तकाजा,
हर फूल को अलग होना हैं,
अपने चमन से

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top