तालीम का इतना तो लिहाज होता,
दुआ न सही,बददुआ भी न देते,
जुबानी ताकते कुछ यूँ बूलदँ की तुमने,
रुह तक राख कर गयी मेरी

CONVERSATION

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Back
to top