लगातार बजती दरवाजे की घंटी से सुमिञा का दिमाग भन्ना गया|
" कौन हैं?तनिक दरवाजा खोलने तक सबर तो कर लिया करे" सुमिञा टेढ़ी आवाज में बोली|
फिर धीमी आवाज में बुदबुदायी,' कोई दरवाजे पर तो बैठे नहीं रहते धरना देकर| घर में दसईयों काम धरे हैं करने को'|
ये बात भी उसी स्वर में कह लेती पर दरवाजे उस पार कौन हैं ये अभी उन्हें पता न था|
दरवाजे पुराने जमाने के टंगे थे|जिसमें'eye hole' जैसे चोंचलो की कोई जगह न थी|कम से कम सुमिञा को ये चोचंले ही लगते थे|समय के बहाव में अपने को बदल लेना उनके स्वभाव के विपरीत था|
दरवाजा ढेलते ही निम्मी एकदम उन से चिपट गयी
" अरे!!! लड़की थोड़ा सबर ला अपने में| क्या बावली सी फुदकती रहती हैं" सुमिञा चिढ़ उठी|
कोई और समय होता तो निम्मी भी इस फटकार से उखड़ जाती पर आज वो बहूत खुश थी|
माँ की इस झिड़की का उस पर कोई असर न हुआ और उसने सुमिञा को गोल-गोल घुमा डाला|
"माँ-माँ मेरा नतीजा आ गया १२ वीं का| ९५% अंक आए है|" एक सांस में ही निम्मी सारा बता गयी|
सुमिञा का चेहरा गर्व से तन गया| जब तक बधाई देती निम्मी अपने भाई-भाभी को बताने दौड़ पड़ी| आज उसने अपने स्वभाव के विपरीत उनका दरवाजा खटखटा लेने की भी जरुरत न समझी|
कमरे में जा अपने भाई से लिपट गयी| निम्मी अपने भाई के बहूत करीब थी|अपनी दिन भर की सारी बात भाई से share करती| इधर भाई की शादी के बाद उसकी इस आदत में थोड़ा ठहराव सा आया हैं| पर आज का दिन तो निम्मी के लिए खास हैं|
" भाई, मुझे ९५% अंक मिले हैं|" निम्मी उत्साह से भरी बोल उठी|
" अरे, वाह गुड़िया ये तो बहूत बड़ी खुशखबरी हैं| मिठाई खिला| ऐसे सुखे-सुखे मैं बधाई नहीं देता" भाई ने निम्मी को छेड़ा|
" उसमें क्या अभी मगंवाती हूँ," निम्मी भी हंस कर बोली|
बधाई भाभी की ओर से भी आई पर उनकी आँखो का रुखा पन निम्मी ने देख लिया| निम्मी कोई छोटी बच्ची नहीं रह गयी थी जो आँखो का भाव न पढ़ पाती|
पल भर में निम्मी का सारा उत्साह तिरोहित हो गया|
फिर जैसे उसे कुछ याद हो आया| भाभी की बहन का नतीजा भी तो आज आना था| पर पुछ लेने की उसकी इच्छा मर गयी|
निम्मी चुपचाप अपने कमरे की ओर बढ़ गयी|
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